पहाड़गंज के बी एंड बी होटल बने ‘लाक्षागृह’, लखनऊ हादसे के बाद भी क्या जागेगा प्रशासन?

नई दिल्ली।

दिल्ली के पहाड़गंज क्षेत्र में संचालित बेड एंड ब्रेकफास्ट (बी एंड बी) होटल अब स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के निशाने पर हैं। उनका आरोप है कि ये होटल सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे हैं और किसी भी बड़े हादसे की आशंका को जन्म दे रहे हैं। मालवीय नगर, लखनऊ में हाल ही में हुई दुखद अग्निकांड घटना में कई बेकसूर लोगों की मौत के बाद यह सवाल और भी गंभीर हो गया है कि क्या दिल्ली प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

पहाड़गंज, जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख ठहराव क्षेत्र माना जाता है, यहां बड़ी संख्या में छोटे-बड़े बी एंड बी होटल संचालित हो रहे हैं। आरोप है कि इनमें से अनेक प्रतिष्ठानों में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं, कई इमारतों में संकरी सीढ़ियां, अवरुद्ध निकास मार्ग और क्षमता से अधिक कमरों का संचालन किया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई भवन पुराने हैं और उनमें सुरक्षा मानकों की नियमित जांच नहीं होती।

सामाजिक संगठनों ने इन होटलों को ‘लाक्षागृह’ की संज्ञा देते हुए कहा है कि यदि किसी भवन में आग लग जाए तो वहां ठहरे पर्यटकों और कर्मचारियों के बाहर निकलने के रास्ते बेहद सीमित हैं। उनका कहना है कि रात के समय अधिकांश लोग कमरों में बंद रहते हैं और ऐसी स्थिति में बचाव कार्य और भी कठिन हो सकता है।

मालवीय नगर, लखनऊ में हुई हालिया दुर्घटना का हवाला देते हुए लोगों ने कहा कि वहां भी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठे थे, लेकिन हादसे के बाद ही प्रशासन हरकत में आया। अब पहाड़गंज के निवासियों और व्यापारिक संगठनों का कहना है कि दिल्ली में ऐसी स्थिति बनने से पहले ही व्यापक जांच अभियान चलाया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि कई प्रतिष्ठान नियमों के विपरीत संचालित हो रहे हैं और समय-समय पर होने वाली जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि दिल्ली सरकार, दिल्ली अग्निशमन सेवा, नगर निगम और पुलिस संयुक्त रूप से क्षेत्र के सभी बी एंड बी होटलों का सर्वे कराएं। जिन भवनों में अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकास, धुआं अलार्म और अन्य आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही, भवनों की क्षमता और लाइसेंस की भी जांच की जाए ताकि अवैध या नियमों के विपरीत संचालित हो रहे प्रतिष्ठानों की पहचान हो सके।

निवासियों का कहना है कि पहाड़गंज की गलियां पहले से ही अत्यंत संकरी हैं। किसी आपात स्थिति में दमकल वाहनों और राहत दलों को पहुंचने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे में यदि किसी होटल में आग लगती है तो नुकसान का दायरा बहुत बड़ा हो सकता है।

हालांकि इस संबंध में संबंधित विभागों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ती चिंता ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। लोगों का कहना है कि सुरक्षा नियमों का पालन केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीन पर भी उसकी सख्ती से निगरानी होनी चाहिए।

पहाड़गंज के नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा पूरे शहर को झकझोर सकता है। अब सबकी निगाहें दिल्ली प्रशासन पर टिकी हैं कि वह लखनऊ जैसी त्रासदी से सबक लेकर पहाड़गंज के इन कथित ‘लाक्षागृहों’ पर कब और कैसी कार्रवाई करता है।

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