प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए “आर्थिक देशभक्ति” का मंत्र दिया है। इसके पीछे पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक अस्थिरता है।हाल ही में अपने संबोधन में पीएम मोदी ने नागरिकों से एक साल तक सोना न खरीदने और ईंधन की बचत करने जैसी 7 महत्वपूर्ण अपीलें की थीं।
इस मुहिम में खुद उदाहरण पेश करते हुए, प्रधान मंत्री ने अपने आधिकारिक काफिले के आकार में दो गाड़ियों की कटौती कर इसे छोटा कर दिया है। SPG प्रोटोकॉल और सुरक्षा मानकों को बरकरार रखते हुए लिया गया यह निर्णय नेतृत्व की उस मिसाल को दर्शाता है, जहां शासन स्वयं त्याग कर जनता को प्रेरित कर रहा है।
द्वारा अपने काफिले में की गई यह कटौती केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि एक गहरा संदेश है। पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया है कि जब देश संकट से जूझ रहा हो, तो सरकारी तंत्र को भी मितव्ययिता अपनानी चाहिए। काफिले से गाड़ियों को हटाकर उन्होंने यह सिद्ध किया है कि सुरक्षा और प्रोटोकॉल के बीच भी संसाधनों का अनुकूलन संभव है। उनके इस कदम के बाद अब गृह मंत्री अमित शाह और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने काफिले छोटे करने की घोषणा की है।
पीएम मोदी की अपील के बाद केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों ने अपने दैनिक परिचालन खर्चों में कटौती का मन बना लिया है। इसके तहत सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को निजी वाहनों के बजाय मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही, कार्यालयों में ‘कार पूलिंग’ को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि ईंधन की खपत कम हो सके। विभाग अब फिजूलखर्ची रोकने के लिए बड़े और भव्य आयोजनों के बजाय सादगीपूर्ण बैठकों पर जोर दे रहे हैं।