वरिष्ठ संवाददाता अशोक कुमार निर्भय
नई दिल्ली। देशभर में हजारों होमबायर्स के साथ कथित धोखाधड़ी और फंड डायवर्जन से जुड़े मामलों की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए गुरुग्राम स्थित एक बिल्डर कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ 11वीं चार्जशीट दाखिल की है। सीबीआई द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यह कार्रवाई हरियाणा के गुरुग्राम में स्थित एक हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं और घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी के मामले में की गई है।
सीबीआई ने बताया कि उसने एम/एस नाइनेक्स डेवलपर्स लिमिटेड और उसके निदेशक के खिलाफ सक्षम न्यायालय में आरोप पत्र दायर किया है। जांच एजेंसी के अनुसार कंपनी और उसके निदेशकों पर आरोप है कि उन्होंने आपराधिक साजिश के तहत बड़ी संख्या में घर खरीदारों और निवेशकों को झूठे आश्वासन, भ्रामक प्रस्तुतियों और आकर्षक वादों के माध्यम से निवेश करने के लिए प्रेरित किया। जांच में यह भी सामने आया कि इन कथित गतिविधियों के जरिए कंपनी ने आर्थिक लाभ अर्जित किया, जबकि निवेशकों और घर खरीदारों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
सीबीआई की जांच में कई महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर आरोप पत्र दायर किया गया है। एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता की उन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है जो आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच के दौरान ऐसे दस्तावेज और प्रमाण मिले हैं जो यह संकेत देते हैं कि परियोजना से जुड़े निवेशकों को वास्तविक स्थिति से अलग तस्वीर दिखाकर धन जुटाया गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला केवल एक परियोजना तक सीमित नहीं है। सीबीआई वर्तमान में देशभर में बिल्डर कंपनियों और कुछ वित्तीय संस्थानों के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ दर्ज 50 मामलों की जांच कर रही है। ये सभी मामले घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी, परियोजनाओं में धन के दुरुपयोग और निवेशकों के हितों को नुकसान पहुंचाने से जुड़े हैं। इन मामलों की जांच उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत की जा रही है।
सीबीआई ने अपनी विज्ञप्ति में बताया कि इससे पहले भी वह इसी प्रकार के मामलों में 10 चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें विभिन्न बिल्डर कंपनियों और उनके निदेशकों के साथ-साथ कुछ बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी का मानना है कि कई मामलों में घर खरीदारों से प्राप्त धनराशि का उपयोग निर्धारित परियोजनाओं में करने के बजाय अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया, जिसके कारण परियोजनाएं अधूरी रह गईं और हजारों परिवार वर्षों तक अपने घरों की प्रतीक्षा करते रहे।
रियल एस्टेट क्षेत्र में लंबे समय से लंबित परियोजनाओं और निवेशकों की शिकायतों को देखते हुए सीबीआई की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं जहां लोगों ने जीवन भर की बचत और बैंक ऋण के माध्यम से फ्लैट बुक कराए, लेकिन वर्षों बाद भी उन्हें कब्जा नहीं मिल सका। इससे न केवल आर्थिक बल्कि मानसिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रभावित परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि आर्थिक अपराधों, भ्रष्टाचार और सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। एजेंसी ने कहा कि आम नागरिकों और घर खरीदारों के हितों को प्रभावित करने वाले मामलों में दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी और जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीआई द्वारा लगातार चार्जशीट दाखिल किए जाने से रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही यह उन निवेशकों और घर खरीदारों के लिए भी राहत की खबर है जो लंबे समय से न्याय और अपने अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
गुरुग्राम के इस बहुचर्चित मामले में 11वीं चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब सभी की निगाहें न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि अदालत में सुनवाई के दौरान सामने आने वाले तथ्यों से प्रभावित घर खरीदारों को न्याय मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा और रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशकों का विश्वास मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।