“29 साल बाद मिला इंसाफ”: सेंट्रल रेंज क्राइम ब्रांच की टीम ने 29 साल पुराने ‘सनसनीखेज हत्याकांड’ को सुलझाया

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा, केंद्रीय रेंज ने 29 साल पुराने जघन्य हत्याकांड को सुलझाते हुए एक फरार आरोपी को गिरफ्तार कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। आरोपी पिछले तीन दशकों से गिरफ्तारी से बच रहा था।

एच.जी.एस. धालीवाल, विशेष पुलिस आयुक्त , अपराध शाखा के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद फहीम उर्फ अली भाई थाना राजौरी गार्डन, दिल्ली में दर्ज एफआईआर संख्या 230/1997, धारा 302 भा.दं.सं. के तहत वांछित था। निरंतर प्रयास, बारीक फील्डवर्क, तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर उसे 03 जुलाई 2026 को ठाकुरगंज, लखनऊ, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया।

14 मार्च 1997 को टीसी कैंप, रघुबीर नगर, दिल्ली के एक कमरे से अज्ञात पुरुष का शव बरामद हुआ था। जांच में मृतक की पहचान शरीफ हसन खान (58 वर्ष) के रूप में हुई, जो फैजाबाद (अब अयोध्या), उत्तर प्रदेश के निवासी थे और राजौरी गार्डन की एक कपड़े की दुकान में काम करते थे।

जांच में सामने आया कि आरोपी रोजगार की तलाश में दिल्ली आया था और मृतक से उसकी जान-पहचान थी। 13 मार्च 1997 को मृतक से पैसे चोरी करने को लेकर दोनों में विवाद हुआ। गुस्से में आकर आरोपी ने लोहे की रॉड से मृतक पर कई वार किए, फिर रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी। शव को लकड़ी के दीवान बॉक्स में छिपाकर वह फरार हो गया।

लगातार प्रयासों के बावजूद आरोपी का पता न चलने पर 14 अक्टूबर 1997 को सक्षम न्यायालय द्वारा उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया और धारा 299 दं.प्र.सं. के तहत कार्रवाई शुरू की गई।

हाल ही में यह मामला फरार आरोपी को पकड़ने के लिए अपराध शाखा की केंद्रीय रेंज को सौंपा गया।

आदित्य गौतम, डीसीपी/क्राइम के समग्र मार्गदर्शन और सतेंद्र मोहन, एसीपी/सेंट्रल रेंज की देखरेख में इंस्पेक्टर सुनील कुमार कलखांडे, एसआई बीरपाल सिंह, हेड कांस्टेबल समंदर, विजय सिंह यादव, जय सिंह, परवीन, राहुल, अंकित और अनूप की टीम ने मामले की गहन समीक्षा की।

इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती थी कि आरोपी 29 साल से फरार था। कोई हालिया फोटो या विश्वसनीय पहचान रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। यह मामला डिजिटल डेटाबेस और आधुनिक तकनीकी जांच उपकरणों से पहले का था। टीम ने आरोपी के पैतृक गांव में सूत्रों से स्थानीय खुफिया जानकारी जुटाई, जिससे पता चला कि आरोपी जिंदा है और कभी-कभी अपने गांव आता है। लगातार निगरानी से आरोपी की मौजूदगी लखनऊ के चौक कोतवाली क्षेत्र में स्थापित हुई। 03 जुलाई 2026 को ठाकुरगंज, लखनऊ से सुनियोजित कार्रवाई कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

लंबी पूछताछ में आरोपी ने अपनी पहचान मोहम्मद फहीम के रूप में बताई और शरीफ हसन खान की हत्या में शामिल होना कबूल किया। उसने बताया कि वारदात पैसों के लेन-देन के विवाद में हुई थी।

हत्या के बाद वह नागपुर भाग गया और फिर मुंबई, लखनऊ और नागपुर जैसे शहरों में “अली भाई” के नाम से पहचान छिपाकर रहने लगा।

करीब तीन दशकों तक आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में ठिकाने बदलता रहा। पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) कारीगर के रूप में काम कर वह अपना गुजारा करता रहा और कानून से बचता रहा।

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