ट्रांसपोर्टर से रिश्वतखोरी के मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दोषी ठहराए गए दिल्ली पुलिस के पूर्व सब-इंस्पेक्टर (SI) जगमल सिंह को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को 30 दिन की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।
सीबीआई द्वारा जांच किए गए इस मामले में विशेष न्यायाधीश ज्योति क्लेर की अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा सात के तहत आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी द्वारा रिश्वत मांगना साबित हो चुका है। सजा के निर्धारण के दौरान अदालत ने कहा कि इस तरह के अपराध समाज, लोकतांत्रिक व्यवस्था और देश की आर्थिक स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में सामाजिक हित को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
शिकायतकर्ता ट्रांसपोर्टर संदीप यादव अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर पंजीकृत 12 ट्रकों का संचालन करता था। उनके ट्रक दिल्ली में चंचल पार्क स्टॉक में माल उतारने के बाद मुंडका और बहादुरगढ़ होते हुए हरियाणा के चरखी दादरी लोडिंग के लिए जाते थे। यादव ने सात फरवरी 2022 को सीबीआई को लिखित शिकायत दी थी कि दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात और नांगलोई ट्रैफिक सर्किल के अंतर्गत मुंडका क्षेत्र में जोनल अधिकारी के रूप में कार्यरत आरोपी जगमल सिंह ने मुंडका क्षेत्र के जोनल अधिकारी होने के नाते ट्रकों को गुजरने देने के बदले प्रति ट्रक दो हजार रुपये यानी कुल 24 हजार रुपये प्रति माह की रिश्वत मांगी थी। साथ ही धमकी दी थी कि रकम न देने पर ट्रकों का चालान किया जाएगा और उन्हें जब्त कर लिया जाएगा। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई।
अभियोजन पक्ष ने अदालत से अधिकतम सजा देने की मांग करते हुए कहा था कि भ्रष्टाचार शासन व्यवस्था और आर्थिक विकास के लिए गंभीर खतरा है। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपी की उम्र 62 वर्ष होने, उसके खिलाफ पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने और उसकी और पत्नी की खराब स्वास्थ्य की स्थिति का हवाला देते हुए नरमी बरतने की अपील की। अदालत ने माना कि अपराध की प्रकृति एक गंभीर पहलू है, जो समाज और देश के आर्थिक हितों को प्रभावित करता है। ऐसे में सामाजिक हित को व्यक्तिगत हित से ऊपर रखना आवश्यक है।