ईरान-अमेरिका के बीच छिड़ी जंग की आग आखिरकार 40वें दिन ठंडी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य हमलों से पीछे हटते हुए दो हफ्ते का सशर्त सीजफायर घोषित किया है। यह फैसला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की शर्त से जुड़ा है। इस घोषणा ने दुनियाभर में राहत की भावना पैदा की है। वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भले सीजफायर का क्रेडिट लेने में जुटे हों, लेकिन ईरान को संघर्ष विराम के लिए मनाने में चीन का अहम रोल सामने आया है. खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस पर मुहर लगाई है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, ‘ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से चीन शांति को बढ़ावा देने और लड़ाई रोकने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है.’ उनका यह जवाब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस बयान का जिक्र था. जिसमें उन्होंने कहा था कि उनका मानना है कि चीन ने ईरान को युद्धविराम के लिए राजी करने में मदद की थी. बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति ने मंगलवार को न्यूज एजेंसी एएफपी से बात करते हुए कहा था कि चीन ने ही ईरान को सीजफायर समझौते पर सहमत होने और बातचीत की मेज पर लाने में मदद की।
माओ ने कहा कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने संबंधित देशों के विदेश मंत्रियों के साथ फोन पर 26 बार बातचीत की है, जबकि मध्य पूर्व मुद्दे पर चीनी सरकार के विशेष दूत ने संबंधित पक्षों के बीच कूटनीति का संचालन किया है. माओ ने आगे कहा कि ‘चीन और पाकिस्तान ने खाड़ी और मध्य पूर्व क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए पांच सूत्रीय पहल का संयुक्त रूप से प्रस्ताव रखा है.’ माओ ने कहा कि एक जिम्मेदार प्रमुख देश के रूप में चीन खाड़ी और मध्य पूर्व में शांति और सुरक्षा बहाल करने में भूमिका निभाता रहेगा और योगदान देता रहेगा।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष-विराम समझौते के तहत ईरान के खिलाफ हमलों को दो हफ्ते के लिए सशर्त रोकने की घोषणा की. उन्होंने इस कदम को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़’ को फिर से खोलने के प्रयासों से जोड़ा. ईरान ने इस प्रस्ताव को अस्थायी रूप से स्वीकार करने का संकेत दिया. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि अगर ईरान पर हमले बंद हो जाते हैं, तो तेहरान भी अपनी सैन्य कार्रवाई रोक देगा। एबीपी