वनवासी सांस्कृतिक समागम में हिस्सा लेने जनजातीय बंधुओं के स्वागत और सत्कार में मादीपुर मंडल अव्वल

अशोक कुमार निर्भय

नई दिल्ली। दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित भव्य ‘वनवासी सांस्कृतिक समागम’ में हिस्सा लेने आए देश के सुदूर क्षेत्रों के जनजातीय बंधुओं के स्वागत और सत्कार में राजधानी ने पलक-पावड़े बिछा दिए। महाराष्ट्र और झारखंड के विभिन्न सुदूर अंचलों से आए एक हजार पांच सौ से अधिक आदिवासी समुदाय के लोगों की मेजबानी को यादगार बनाने के लिए स्थानीय सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं ने दिन-रात एक कर दिया। इस विशाल समागम में पहुंचे अतिथियों के रहने, खाने-पीने और सुगम यातायात की संपूर्ण जिम्मेदारी मादीपुर मंडल के अध्यक्ष प्रदीप यादव और पंजाबी बाग मंडल के अध्यक्ष कमल ने पूरी तन्मयता के साथ संभाली।
देश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और कला को प्रदर्शित करने वाले इस समागम के लिए दिल्ली पहुंचे इन विशेष अतिथियों के ठहरने और आराम की उत्तम व्यवस्था पंजाबी बाग पश्चिम स्थित सरस्वती शिशु बाल मंदिर स्कूल में की गई थी। स्कूल परिसर को पूरी तरह से एक बड़े अतिथि गृह के रूप में परिवर्तित कर दिया गया था, ताकि लंबी यात्रा कर के दिल्ली पहुंचे महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी बंधुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। यहां उनके विश्राम से लेकर स्वच्छता और प्राथमिक चिकित्सा तक के सभी कड़े प्रबंध किए गए थे।
इस सांस्कृतिक समागम के निमित्त आयोजित विशाल भंडारे में सभी आदिवासी अतिथियों को पूरी श्रद्धा और आदर के साथ भोजन प्रसाद ग्रहण कराया गया। भोजन व्यवस्था के दौरान सेवा में जुटे मादीपुर मंडल के अध्यक्ष प्रदीप यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सुदूर वनों और पर्वतीय क्षेत्रों से आए हमारे ये भाई-बहन हमारी संस्कृति की वास्तविक धरोहर हैं। लाल किला के इस ऐतिहासिक समागम में इनका शामिल होना हमारे लिए गौरव की बात है और दिल्ली में इनकी सेवा करने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है। उन्होंने गर्व से कहा कि अतिथियों के सत्कार में उनके मंडल की पूरी टीम ने चौबीसों घंटे लगकर काम किया है।
प्रदीप यादव ने इस पूरी व्यवस्था को सफल बनाने के लिए अपनी टीम के सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मंडल उपाध्यक्ष नरेश अटल, बाबू लाल भागवत, महामंत्री ताराचंद दोतनिया, संजीव सोनकर, मिश्री लाल खोरवाल, पायल फुलवरिया, शोभा, मोहन लाल मौर्य और विपुल दुआ जैसे कर्मठ साथियों ने इस सेवा कार्य में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सभी अनुषांगिक शाखाओं के वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का भी विशेष रूप से आभार प्रकट किया, जिन्होंने व्यवस्था के हर मोर्चे को बेहद कुशल और अनुशासित ढंग से संभाला।
लाल किला में आयोजित इस वनवासी सांस्कृतिक समागम का उद्देश्य देश के नागरिकों को आदिवासी समाज की कला, जीवन शैली और उनके ऐतिहासिक योगदान से परिचित कराना है। महाराष्ट्र और झारखंड से आए इन लोक कलाकारों और जनजातीय प्रतिनिधियों ने दिल्ली की इस पारंपरिक मेहमाननवाज़ी की जमकर सराहना की। पंजाबी बाग और मादीपुर मंडल के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई इस सुदृढ़ व्यवस्था ने यह सिद्ध कर दिया कि देश की राजधानी अपने अतिथि सत्कार के लिए सदैव तत्पर रहती है। स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों के इस एकजुट प्रयास से सरस्वती शिशु बाल मंदिर स्कूल में ठहरा हर एक अतिथि दिल्ली से एक सुखद और आत्मीय स्मृति लेकर अपने राज्यों की ओर रवाना हुआ।

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