टीबी से जुड़े सवाल – डॉ. एस. के. अरोड़ा के साथ : आधुनिक आणविक जांच (CBNAAT, Truenat एवं NAAT): टीबी की शीघ्र एवं सटीक पहचान

जानिए जरूरी सवाल जवाब

प्रश्न 1. आणविक (Molecular) जांच क्या होती है?
उत्तर: आणविक जांच ऐसी आधुनिक प्रयोगशाला जांच है, जिसमें टीबी के जीवाणु (Mycobacterium tuberculosis) के आनुवंशिक पदार्थ (DNA) की पहचान की जाती है। इससे टीबी की पुष्टि पारंपरिक जांचों की तुलना में अधिक तेज़ और अधिक सटीक तरीके से हो जाती है।

प्रश्न 2. CBNAAT क्या है?
उत्तर: CBNAAT (Cartridge-Based Nucleic Acid Amplification Test) एक आधुनिक आणविक जांच है, जो लगभग दो घंटे में टीबी की पुष्टि करने के साथ-साथ यह भी बताती है कि रोगी में रिफैम्पिसिन दवा के प्रति प्रतिरोध (Drug Resistance) है या नहीं। इससे सही उपचार शीघ्र शुरू किया जा सकता है।

प्रश्न 3. Truenat क्या है?
उत्तर: Truenat भारत में विकसित एक स्वदेशी, पोर्टेबल आणविक जांच प्रणाली है। यह दूर-दराज़ क्षेत्रों में भी उपयोगी है और कम समय में टीबी तथा रिफैम्पिसिन प्रतिरोध की पहचान करने में सक्षम है।

प्रश्न 4. NAAT क्या है?
उत्तर: NAAT (Nucleic Acid Amplification Test) आधुनिक आणविक जांच तकनीकों का समूह है, जो टीबी के जीवाणु के DNA की पहचान करता है। CBNAAT और Truenat इसी तकनीक पर आधारित जांचें हैं।

प्रश्न 5. किन लोगों को यह जांच करानी चाहिए?
उत्तर: जिन लोगों में दो सप्ताह या उससे अधिक समय से खांसी, खांसी में खून आना, बुखार, वजन कम होना या रात में पसीना आने जैसे लक्षण हों, उन्हें चिकित्सकीय सलाह पर यह जांच करानी चाहिए। बच्चों, HIV संक्रमित व्यक्तियों, गंभीर रूप से बीमार रोगियों तथा दवा-प्रतिरोधी टीबी की आशंका वाले रोगियों में भी यह जांच अत्यंत उपयोगी है।

प्रश्न 6. क्या यह जांच साधारण बलगम जांच से बेहतर है?
उत्तर: हाँ। यह जांच अधिक संवेदनशील एवं सटीक है। कम संख्या में जीवाणु होने पर भी टीबी की पहचान कर सकती है तथा साथ ही दवा प्रतिरोध का भी पता लगा सकती है, जिससे उपचार में देरी नहीं होती।

प्रश्न 7. क्या इन जांचों से दवा-प्रतिरोधी टीबी का पता चल सकता है?
उत्तर: हाँ। CBNAAT और Truenat रिफैम्पिसिन प्रतिरोध का शीघ्र पता लगाने में सक्षम हैं। इससे दवा-प्रतिरोधी टीबी के रोगियों का उचित उपचार समय पर प्रारम्भ किया जा सकता है।

प्रश्न 8. क्या ये जांच सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध हैं?
उत्तर: जी हाँ। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के अंतर्गत देशभर के चिन्हित सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में CBNAAT एवं Truenat जांच निःशुल्क उपलब्ध है।

प्रश्न 9. क्या केवल यही जांच पर्याप्त है?
उत्तर: नहीं। रोगी की स्थिति के अनुसार चिकित्सक छाती का एक्स-रे, कल्चर, Drug Susceptibility Testing (DST) या अन्य आवश्यक जांच भी लिख सकते हैं। सही निदान हमेशा चिकित्सकीय मूल्यांकन के साथ किया जाता है।

प्रश्न 10. भारत से टीबी उन्मूलन में इन जांचों की क्या भूमिका है?
उत्तर: शीघ्र एवं सटीक पहचान से उपचार जल्दी शुरू होता है, संक्रमण का प्रसार कम होता है, दवा-प्रतिरोधी टीबी का समय पर पता चलता है और उपचार की सफलता बढ़ती है। इसलिए आणविक जांच भारत के टीबी मुक्त भारत अभियान की महत्वपूर्ण आधारशिला है।

      *निष्कर्ष* 

डॉ. एस. के. अरोड़ा के अनुसार यदि आपको दो सप्ताह या उससे अधिक समय से खांसी, खांसी में खून आना , बुखार, वजन कम होना या रात में पसीना आ रहा है, तो जांच कराने में देरी न करें। आधुनिक आणविक जांच से टीबी का शीघ्र पता लगाकर समय पर उपचार शुरू किया जा सकता है।

शीघ्र जांच → शीघ्र उपचार → बेहतर स्वास्थ्य → टीबी मुक्त भारत

तंबाकू छोड़ें। → टीबी समाप्त करें। → जीवन बचाएँ।

डॉ. एस.के. अरोड़ा
सीनियर चेस्ट विशेषज्ञ,कंसल्टेंट,
पूर्व दिल्ली स्टेट टीबी हेड, दिल्ली सरकार (डब्ल्यूएचओ द्वारा सम्मानित)
TB Expert | Tobacco Control Advocate | Public Health (India)

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