पूर्वी जिला पुलिस ने फर्जी विदेशी नौकरी रैकेट का किया भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली, 17 जून 2026

पूर्वी जिला साइबर थाना पुलिस ने नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह बेरोजगार युवाओं को जापान की नामी कंपनियों — टोयोटा और निप्पॉन स्टील कॉरपोरेशन — में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में बरेली, उत्तर प्रदेश से दो आरोपियों कुश भटनागर और अमित को गिरफ्तार किया है।

क्या था मामला
राजीव कुमार आईपीएस, डीसीपी पूर्वी जिला, दिल्ली के मुताबिक, शिकायतकर्ता “R” ने साइबर थाना पूर्वी जिला में शिकायत दर्ज कराई थी कि अज्ञात लोगों ने उन्हें जापान में नौकरी दिलाने के नाम पर 1,63,000 रुपये जमा करवा लिए। आरोपियों ने खुद को भर्ती सलाहकार और विदेशी कंपनियों का अधिकारी बताकर डॉक्यूमेंटेशन चार्ज, वेरिफिकेशन चार्ज, वीज़ा प्रोसेसिंग फीस और एमईए अटेस्टेशन जैसे बहानों से पैसे वसूले। शिकायत के आधार पर 22/12/2025 को ई-एफआईआर संख्या 140/25 धारा 318(4)/319(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया।

कैसे पकड़े गए आरोपी
जांच के दौरान पुलिस ने मनी ट्रेल का विश्लेषण किया। पता चला कि ठगी की रकम कई खातों में घुमाई गई थी। पहली परत में 1,27,400 रुपये कुश भटनागर के खाते में सीधे ट्रांसफर हुए थे। आगे की जांच में सह-आरोपी अमित के खाते में 14,850 रुपये भेजे जाने का खुलासा हुआ, जिसने रकम निकालकर आगे भेजने में मदद की।

पूर्वी जिला साइबर थाने की टीम ने बरेली में दबिश देकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल सबूत और मनी ट्रेल के आधार पर दोनों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले। जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी देशभर के नौकरी चाहने वालों को निशाना बनाने वाले संगठित गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं।

गिरोह का तरीका

  1. ऑनलाइन जॉब पोर्टलों से नौकरी तलाशने वालों का डेटा चुराया जाता था। 2. टोयोटा जापान और निप्पॉन स्टील जैसी कंपनियों के नाम से फर्जी ईमेल भेजे जाते थे। 3. पीड़ितों को बताया जाता कि उनका सीवी विदेशी नौकरी के लिए शॉर्टलिस्ट हुआ है। 4. फर्जी इंटरव्यू लेकर दस्तावेज मंगवाए जाते थे। 5. फिर एमईए अटेस्टेशन रिपोर्ट, एंप्लॉयमेंट अप्रूवल लेटर, एंबेसी क्लीयरेंस, वीज़ा फीस के नाम पर पैसे जमा करवाए जाते थे। 6. ठगी की रकम छिपाने के लिए कई बैंक खाते, सिम कार्ड, ईमेल आईडी और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल होता था।
    बरामदगी और डिजिटल सबूत
  • कुश भटनागर से: एक मोबाइल फोन, दो जियो सिम, भर्ती से जुड़े ईमेल अकाउंट्स का एक्सेस, व्हाट्सएप चैट और विदेशी कंपनियों के नाम पर फर्जी भर्ती से जुड़े सबूत। • अमित से: एक मोबाइल फोन और ठगी की रकम प्राप्त करने व निकालने से जुड़े डिजिटल सबूत।

आगे की जांच
पुलिस अन्य सदस्यों और सहयोगियों की तलाश में जुटी है। गिरोह के अन्य पीड़ितों, पूरे मनी ट्रेल और ठगी की रकम की रिकवरी पर जांच जारी है।

पुलिस की अपील
पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त राजीव कुमार, आईपीएस ने जनता से अपील की है कि ऑनलाइन नौकरी के लिए आवेदन करते समय सावधानी बरतें:

  • किसी भी भर्ती एजेंसी या नियोक्ता की प्रमाणिकता जांचे बिना भुगतान न करें। • नौकरी, इंटरव्यू, वीज़ा या डॉक्यूमेंटेशन के नाम पर पैसे ट्रांसफर न करें। • कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और ईमेल डोमेन की जांच करें। • साइबर ठगी की तुरंत सूचना राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या www.cybercrime.gov.in पर दें।

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