जानिए जरूरी सवाल जवाब
प्रश्न 1. क्या बिना बीमारी के भी शरीर में टीबी के जीवाणु हो सकते हैं?
उत्तर: हाँ। इसे लेटेंट टीबी संक्रमण (Latent Tuberculosis Infection – LTBI) कहते हैं। इसमें टीबी के जीवाणु शरीर में मौजूद रहते हैं, लेकिन निष्क्रिय (सोई हुई अवस्था) में होते हैं। व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ महसूस करता है, उसे कोई लक्षण नहीं होते और वह किसी दूसरे व्यक्ति में संक्रमण नहीं फैलाता।
प्रश्न 2. लेटेंट टीबी और सक्रिय (Active) टीबी में क्या अंतर है?
उत्तर: सक्रिय टीबी में व्यक्ति को लगातार खाँसी, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना जैसे लक्षण होते हैं और वह दूसरों में संक्रमण फैला सकता है।
इसके विपरीत, लेटेंट टीबी में कोई लक्षण नहीं होते। व्यक्ति सामान्य जीवन जीता है और दूसरों के लिए संक्रमण का स्रोत नहीं होता। लेकिन यदि भविष्य में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाए, तो यही संक्रमण सक्रिय टीबी में बदल सकता है।
प्रश्न 3. क्या लेटेंट टीबी वाला व्यक्ति परिवार के अन्य लोगों को टीबी फैला सकता है?
उत्तर: नहीं। लेटेंट टीबी संक्रमण वाला व्यक्ति टीबी नहीं फैलाता। केवल सक्रिय फेफड़ों की टीबी से पीड़ित व्यक्ति ही खाँसने, छींकने या बोलने के दौरान संक्रमण फैला सकता है।
प्रश्न 4. किन लोगों में लेटेंट टीबी के सक्रिय टीबी बनने का खतरा अधिक होता है?
उत्तर: निम्नलिखित लोगों में जोखिम अधिक होता है—
टीबी रोगी के परिवार के सदस्य, विशेषकर छोटे बच्चे,
एचआईवी संक्रमित व्यक्ति,
मधुमेह (डायबिटीज़) के रोगी,
कुपोषित व्यक्ति, कैंसर या किडनी रोग से पीड़ित व्यक्ति , लंबे समय तक स्टेरॉयड या प्रतिरक्षा कम करने वाली दवाएँ लेने वाले मरीज ।
इन लोगों को चिकित्सकीय सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
प्रश्न 5. लेटेंट टीबी की पहचान कैसे होती है?
उत्तर: लेटेंट टीबी संक्रमण की पहचान कुछ विशेष परिस्थितियों में की जाती है। इसके लिए चिकित्सक आवश्यकता अनुसार निम्न परीक्षणों की सलाह दे सकते हैं—
ट्यूबरकुलिन स्किन टेस्ट (TST / Mantoux Test)
Cy-TB (CyTB) जैसे आधुनिक परीक्षण, जहाँ उपलब्ध और उपयुक्त हों।
यदि डॉक्टर को लेटेंट टीबी की संभावना लगती है, तो सबसे पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि व्यक्ति को सक्रिय टीबी तो नहीं है। इसके बाद ही आवश्यक होने पर टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) शुरू किया जाता है।
प्रश्न 6. क्या लेटेंट टीबी का इलाज संभव है?
उत्तर: हाँ। जिन लोगों में सक्रिय टीबी बनने का खतरा अधिक होता है, उन्हें डॉक्टर टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) की सलाह दे सकते हैं। यह उपचार भविष्य में सक्रिय टीबी होने की संभावना को काफी कम कर देता है। दवा हमेशा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पूरी अवधि तक लेनी चाहिए।
प्रश्न 7. भारत के टीबी उन्मूलन अभियान में लेटेंट टीबी क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यदि केवल सक्रिय टीबी का इलाज किया जाए और लेटेंट संक्रमण वाले उच्च जोखिम व्यक्तियों की पहचान न की जाए, तो भविष्य में नए टीबी मरीज सामने आते रहेंगे।
इसीलिए राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) में उच्च जोखिम वाले लोगों की पहचान और आवश्यकता अनुसार टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) पर विशेष बल दिया जा रहा है।
“डॉ. एस. के. अरोड़ा की सलाह” :
“लेटेंट टीबी बीमारी नहीं, बल्कि संक्रमण की एक निष्क्रिय अवस्था है। समय पर पहचान और आवश्यक प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट भविष्य की टीबी को रोक सकता है। टीबी से डरें नहीं, उसे समझें और घबराएँ नहीं, बल्कि जागरूक बनें। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में अपना इलाज कराएं और
परिवार के अन्य सदस्यों, विशेषकर छोटे बच्चों और उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की समय पर जाँच कराएँ । अन्य सदस्यों की भी चिकित्सकीय सलाह लें और सबका X ray chest कराएँ। सही समय पर जाँच और आवश्यकता होने पर प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट भविष्य की टीबी को रोक सकता है।”
तंबाकू छोड़ें → टीबी रोकें → जीवन बचाए
डॉ. एस.के. अरोड़ा
सीनियर चेस्ट विशेषज्ञ,कंसल्टेंट,
पूर्व दिल्ली स्टेट टीबी हेड, दिल्ली सरकार (डब्ल्यूएचओ द्वारा सम्मानित)
TB Expert | Tobacco Control Advocate | Public Health (India)