नई दिल्ली (अशोक कुमार निर्भय )। मानवता, संवेदनशीलता और सामूहिक प्रयास की ताकत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यदि समाज जागरूक होकर किसी जरूरतमंद की मदद के लिए एकजुट हो जाए तो मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति का समाधान निकाला जा सकता है। बिहार के पटना जिले के फुलवारी शरीफ क्षेत्र के नोन्हासा गांव से 7 सितंबर को लापता हुई 11 वर्षीय बच्ची ईशा रहमान आखिरकार दिल्ली के करोल बाग स्थित देशबंधु गुप्ता रोड पर एक सामाजिक संस्था के पास सुरक्षित मिल गई। बच्ची के सकुशल मिलने की खबर सामने आते ही उसके परिवार में खुशी और राहत की लहर दौड़ गई।
बच्ची की तलाश में जाग मानव जाग परिवार की फाउंडर चेयरमैन और सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता विजयलक्ष्मी पांडे के प्रयासों के साथ ऑल इंडिया गार्डन काउंसिल, रतनेश कुमार, जोनल सचिव एआईजीसी दक्षिण मध्य एवं दक्षिण तटीय क्षेत्र, दिल्ली पुलिस, बिहार पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल, राजकीय रेलवे पुलिस, सहयोगी गैर सरकारी संस्थाओं, मीडिया संस्थानों और अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बताया गया कि बच्ची के लापता होने की जानकारी मिलते ही विजयलक्ष्मी पांडे ने वीडियो संदेश के साथ लिखित संदेश भी विभिन्न माध्यमों और वाट्सऐप समूहों में साझा कराया। इसके बाद बच्ची की तलाश को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया गया और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य सूचनाओं के आधार पर संबंधित अधिकारियों और संस्थाओं से संपर्क किया गया।
बताया गया कि बच्ची दिल्ली पहुंच गई थी और बाद में करोल बाग क्षेत्र में एक सज्जन के माध्यम से उसे ऐसी संस्था तक पहुंचाया गया, जो जाग मानव जाग परिवार की सहयोगी संस्था है और बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण से जुड़े कार्य करती है। बच्ची के सुरक्षित मिलने के बाद उसके परिजनों को सूचना दी गई और परिवार के सदस्य दिल्ली पहुंचे। इसके बाद बच्ची को सकुशल बिहार ले जाया गया। बच्ची के मामा, नाना-नानी, माता-पिता और अन्य परिजनों ने राहत की सांस लेते हुए सभी सहयोगियों के प्रति आभार जताया।
बच्ची के घर से निकलने और दिल्ली पहुंचने की परिस्थितियों को लेकर अभी पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है। बताया जा रहा है कि वह घर से बाहर निकली और बाद में स्टेशन की ओर चली गई। उसके साथ ऐसा क्यों हुआ और वह इतनी दूर कैसे पहुंची, इसकी वास्तविक स्थिति संबंधित स्तर पर स्पष्ट की जा रही है। ऐसे मामलों में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस और संबंधित एजेंसियों की जांच का इंतजार करना जरूरी है।
एआईजीसी के जोनल सचिव रतनेश कुमार ने विजयलक्ष्मी पांडे और उनके सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी मानवता के लिए किए गए प्रयासों का महत्व बहुत बड़ा है। उन्होंने पूर्व के एक मामले का उल्लेख करते हुए बताया कि कोविड-19 के कठिन दौर में एआईजीसी परिवार के प्रयासों से आंध्र प्रदेश के गुंटूर से तीन लड़कियों को सुरक्षित निकालकर ओडिशा पहुंचाया गया था। उनके अनुसार वर्तमान घटना ने एक बार फिर सामूहिक संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया है।
बच्ची के सुरक्षित मिलने के बाद विजयलक्ष्मी पांडे ने इस सफलता का श्रेय स्वयं तक सीमित रखने के बजाय दिल्ली पुलिस, बिहार पुलिस, जीआरपी, आरपीएफ, सहयोगी गैर सरकारी संस्थाओं, मीडिया सहयोगियों और अभियान से जुड़े सभी लोगों को दिया। उन्होंने कहा कि एक संदेश जब सही लोगों तक पहुंचता है तो वह केवल सूचना नहीं रहता, बल्कि किसी परिवार के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है।
उन्होंने कहा, “मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं और किसी की जिंदगी बचाने से बड़ा कोई पुण्य नहीं।” उनका कहना था कि व्यस्त जीवन के बावजूद समाज में किसी व्यक्ति या परिवार पर संकट आए तो इंसानियत के नाते मदद के लिए समय निकालना चाहिए। यदि नेक उद्देश्य के साथ सामूहिक प्रयास किया जाए तो सफलता अवश्य मिलती है।
रेल परिवार और एआईजीसी परिवार की ओर से जाग मानव जाग परिवार की इस पहल को सराहते हुए विजयलक्ष्मी पांडे के साहस, संवेदनशीलता और मानवता को नमन किया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने यह संदेश दिया है कि लापता बच्चों की तलाश में समय पर सूचना, पुलिस-प्रशासन का सहयोग, तकनीकी संसाधनों का उपयोग और समाज की सामूहिक सक्रियता बेहद महत्वपूर्ण है। जाग मानव जाग परिवार ने स्पष्ट किया कि मानवता और जरूरतमंदों की सहायता की यह मुहिम आगे भी जारी रहेगी।