नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच, सेंट्रल रेंज ने 17 साल से फरार चल रहे अपहरण और रेप के आरोपी इरशाद अहमद उर्फ सोनू को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी पर ₹25,000 का इनाम घोषित था और वह 2009 से कानून से बचता फिर रहा था। गिरफ्तारी के समय आरोपी अपने पैतृक गांव बिजनौर, उत्तर प्रदेश में मौजूद था।
क्या है पूरा मामला
9 अप्रैल 2009 को थाना बिंदापुर, दिल्ली में FIR नंबर 117/2009 धारा 363/366/376/506/511/342 IPC के तहत मामला दर्ज हुआ था। शिकायतकर्ता दिल्ली में बुटीक चलाती थीं और आरोपी इरशाद उनके यहां दर्जी का काम करता था। आरोप है कि उसने शिकायतकर्ता की नाबालिग बेटी का अपहरण कर शादी की नीयत से उसके साथ दुष्कर्म किया। वारदात के बाद से ही आरोपी फरार हो गया।
25 मई 2011 को माननीय कोर्ट श्री सुशांत चंगोत्रा, एलडी एमएम, द्वारका कोर्ट, दिल्ली ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था।
कैसे हुई गिरफ्तारी
यह केस बेहद संवेदनशील था और आरोपी 17 साल से पुलिस को चकमा दे रहा था। केस को सुलझाने की जिम्मेदारी क्राइम ब्रांच की सेंट्रल रेंज को सौंपी गई।
एसीपी सतेंद्र मोहन के नेतृत्व में इंस्पेक्टर विनय कुमार, एसआई रितेश, विकास, जय कुमार और हेड कांस्टेबल बिजेंद्र सिंह, पंकज की टीम बनाई गई। टीम ने तकनीकी सर्विलांस और मैनुअल इंटेलिजेंस के जरिए महीनों तक काम किया।
जांच में पता चला कि आरोपी 2009 में फरार होने के बाद 2011 में चंडीगढ़ से पासपोर्ट बनवाकर कुवैत भाग गया था। वहां वह दर्जी का काम करने लगा और लगभग वहीं बस गया। वह भारत बहुत कम आता था, सिर्फ खास पारिवारिक मौकों पर।
एसआई रितेश को पुख्ता सूचना मिली कि आरोपी 3 जून 2026 को एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने अपने गांव बिजनौर आया है और इस महीने के अंत में वापस कुवैत जाने वाला है। इस सूचना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए टीम ने 16 जून 2026 को बिजनौर में जाल बिछाकर आरोपी को दबोच लिया।
आरोपी का प्रोफाइल
42 वर्षीय इरशाद अहमद उर्फ सोनू बिजनौर, यूपी का रहने वाला है। कुवैत में वह बुटीक में दर्जी का काम करता था और वहीं उसने दूसरी शादी भी कर ली थी। उसका परिवार अभी भी बिजनौर में रहता है।
पुलिस का बयान
डीसीपी क्राइम ब्रांच-II, हर्ष इंदौरा, आईपीएस ने बताया कि इस गिरफ्तारी से 17 साल पुराना अपहरण और रेप का मामला सुलझ गया है। यह ऑपरेशन क्राइम ब्रांच की लंबी और लगातार कोशिशों का नतीजा है। आरोपी की गिरफ्तारी से पीड़िता को न्याय मिलने की प्रक्रिया और मजबूत होगी।