चंडीगढ़ / पंजाब ब्यूरो
पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपनी उपलब्धियों के प्रचार पर किए जा रहे बेतहाशा विज्ञापन खर्च पर रोक लगा दी है।
कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से अपनी पार्टी का प्रचार करना बंद किया जाए। कोर्ट ने मुख्य सचिव से हलफनामा दायर कर पूछा है कि 1 अप्रैल 2024 से अब तक विज्ञापनों पर कितना पैसा खर्च किया गया, किस राज्य में, किस भाषा में और किस चैनल-अखबार को कितना भुगतान किया गया।
कोर्ट ने पहले भी मांगा था हिसाब
यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी जस्टिस विनोद भारद्वाज की बेंच ने सरकार से विज्ञापनों, मंत्रियों के बंगलों के नवीनीकरण और दिल्ली-सुप्रीम कोर्ट में मुकदमेबाजी पर खर्च हुए पैसे का पूरा ब्यौरा मांगा था। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि सरकार विज्ञापन पर खर्च का खुलासा करने का इरादा नहीं रखती है।
सरकार ने जवाब में कहा था कि विज्ञापनों और पुलिस वाहनों पर खर्च की धनराशि का ब्यौरा जुटाना समय लेने वाली प्रक्रिया है, जिसके बाद कोर्ट ने आखिरी मौका दिया था।
केजरीवाल खेमे में हड़कंप
हाईकोर्ट के इस सख्त आदेश के बाद दिल्ली में आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के मुताबिक हाईकोर्ट के आदेश की खबर मिलते ही अरविंद केजरीवाल सदमे में हैं। पंजाब को AAP का मॉडल स्टेट बताकर पूरे देश में प्रचार करने की रणनीति पर अब ग्रहण लगता दिख रहा है।
विपक्ष ने भी मान सरकार पर हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि अस्पतालों में आयुष्मान योजना के 500 करोड़ से ज्यादा के भुगतान बकाया हैं, लेकिन सरकार के पास विज्ञापनों के लिए हजारों करोड़ हैं।
फिलहाल हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक किसी भी नए विज्ञापन टेंडर और भुगतान पर रोक लगाते हुए सरकार से विस्तृत हलफनामा तलब किया है।