दिल्ली क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़े एक दशक से फरार आजीवन सजायाफ्ता दो भाई, एक पर मुंबई में सुपारी किलिंग का भी आरोप

नई दिल्ली, 7 जुलाई 2026
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए हत्या के दो अलग-अलग मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दो भगोड़े भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी पिछले दस साल से फरार चल रहे थे। इनमें से एक आरोपी मुंबई में 2006 में हुई एक सनसनीखेज सुपारी किलिंग केस में भी वांछित था।

दो राज्यों से एक साथ हुई गिरफ्तारी
क्राइम ब्रांच की एंटी रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल (ARSC) के इंस्पेक्टर रोबिन त्यागी के नेतृत्व में गठित टीम ने एसीपी संजय कुमार नागपाल की निगरानी में यह कार्रवाई की। 4 जुलाई को एक साथ दो राज्यों में छापेमारी कर आरोपियों को दबोचा गया। पहला आरोपी फिरासत अली, उम्र 56 साल, को मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश से और दूसरा आरोपी शाहनवाज अली, उम्र 51 साल, को गोड्डा, झारखंड से गिरफ्तार किया गया।

1996 के दिल्ली मर्डर केस में मिली थी उम्रकैद
27 सितंबर 1996 को राजौरी गार्डन थाना इलाके में पुराने कपड़ों की खरीद को लेकर हुए विवाद में शाहनवाज ने अपने भाई फिरासत, अरशद और जहांगीर खान के साथ मिलकर शराफत अली के परिवार पर चाकुओं से हमला कर दिया था। हमले में इश्तियाक अहमद उर्फ पप्पू की मौत हो गई थी, जबकि रियासत उर्फ भूरा और डब्बू घायल हुए थे।

इस मामले में 31 मई 2000 को तीस हजारी कोर्ट ने फिरासत और शाहनवाज को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दोनों को साल 2000 में अपील लंबित होने के कारण हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। लेकिन 12 मई 2016 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर सजा बरकरार रखी और जेल में सरेंडर करने का आदेश दिया। आदेश के बावजूद दोनों भाई फरार हो गए।

मुंबई में सिर-कटा शव फेंकने का आरोप
जांच में सामने आया कि जमानत पर बाहर रहने के दौरान फिरासत अली ने 2006 में मुंबई में एक सुपारी किलिंग को अंजाम दिया। 14 मई 2006 को भिंडी बाजार, मुंबई में एक प्लास्टिक बैग में लिपटा बिना सिर और अंगों वाला धड़ मिला था। करीब 12 साल बाद 2018 में मुंबई पुलिस ने खुलासा किया कि शव किसान खरवा का था।

पुलिस के मुताबिक, मृतक की पत्नी बंसीबेन खरवा ने पति की शराब की लत और मारपीट से तंग आकर फिरासत अली और इरशाद अली को 2 लाख रुपये की सुपारी देकर हत्या कराई थी। फिरासत ने हत्या कर शव के टुकड़े-टुकड़े कर अलग-अलग जगह फेंक दिए, ताकि पहचान छिपाई जा सके। 2018 में मुंबई पुलिस ने फिरासत को गिरफ्तार किया था, लेकिन 22 जनवरी 2021 को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह फिर फरार हो गया और भगोड़ा घोषित कर दिया गया।

लगातार बदलते रहे ठिकाने, कपड़े बेचकर करते थे गुजारा
पूछताछ में फिरासत ने बताया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए वह यूपी, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में छिपता रहा और पुराने कपड़ों का कारोबार कर गुजारा करता था। वहीं शाहनवाज यूपी, महाराष्ट्र और झारखंड में नाम बदलकर रह रहा था और वही काम करता था।

ऐसे धरे गए दोनों आरोपी
क्राइम ब्रांच की टीम को हेड कांस्टेबल मिंटू से दोनों भाइयों के बारे में गुप्त सूचना मिली थी। जानकारी पुख्ता होने पर दो अलग-अलग टीमें बनाई गईं। पहली टीम एएसआई संजीव, हेड कांस्टेबल मिंटू और सवाई सिंह के साथ मुरादाबाद पहुंची, जबकि दूसरी टीम इंस्पेक्टर रोबिन त्यागी, एएसआई सचिन, नरेंद्र और हेड कांस्टेबल आदेश के साथ गोड्डा रवाना हुई। 4 जुलाई को एक ही समय पर दोनों जगह छापा मारकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया, ताकि वे एक-दूसरे को सतर्क न कर सकें।

परिवार का आपराधिक इतिहास
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी मूल रूप से मुरादाबाद के रहने वाले हैं। इनके परिवार में छह भाई थे – अरशद अली (मृतक), फिरासत, इरशाद, शाहनवाज, नौशाद और वसीम। परिवार का पारंपरिक काम देश के अलग-अलग हिस्सों में पुराने कपड़ों का कारोबार करना रहा है।

अभी तिहाड़ में बंद, मुंबई पुलिस को दी गई सूचना
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। फिरासत अली की गिरफ्तारी की सूचना मुंबई पुलिस को भी दे दी गई है, क्योंकि वह वहां सुपारी किलिंग केस में वांछित है।

डीसीपी क्राइम संजीव कुमार यादव, आईपीएस ने बताया कि यह ऑपरेशन दिल्ली पुलिस की लगातार और ठोस कोशिशों का नतीजा है। इससे साफ है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराधी कितना भी छिपे, आखिरकार पकड़ा ही जाता है।

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