लोग पूछ रहे हैं — किसी का चिराग़ बुझाकर अपने घर दिवाली मनाते दिल्ली के बिल्डर और MCD बिल्डिंग डिपार्टमेंट?

नई दिल्ली:हौज काजी इमारत हादसा: मलबे से चौथा शव बरामद, मृतकों की संख्या बढ़कर 4 हुई। दिवाली के ठीक बाद हुए इस हादसे ने एक बार फिर अवैध और असुरक्षित निर्माण पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मजदूरों के घरों में जहां मातम पसरा है, वहीं इलाके के लोग पूछ रहे हैं कि आखिर बिना सुरक्षा और बिना निगरानी के बन रही इमारतों पर कार्रवाई कब होगी?

वही स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसों के बावजूद, लोगों की जान जाने के बावजूद, दिल्ली सरकार की मुख्यमंत्री के सख्त आदेशों के बावजूद दिल्ली का पहाड़गंज एक ऐसा इलाका है जहां अवैध निर्माण खुलेआम चल रहे हैं। लोगों का कहना है कि यहां पार्षद भी भाजपा से है और तो और ट्रिपल इंजन की सरकार भाजपा की, तो पहाड़गंज में चल रहे अवैध निर्माणों पर डीएमसी एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही कैसे हो। खुद MCD करोल बाग जोन बिल्डिंग डिपार्टमेंट भी इन अवैध निर्माणों पर डीएमसी एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही से डरता है।

पहाड़गंज के लोगों का कहना है कि क्या हमने इसलिए भाजपा को वोट दिया था कि पहाड़गंज की हर गली में होटल बने और स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो। अब कहां है मोदी जी की नीति “ना खाऊंगा ना खाने दूंगा”? पूछता है देश, पूछती है दिल्ली? पूछता है पहाड़गंज? क्या ऐसे ही दिलों पर राज करेगी भाजपा?

वही पुरानी दिल्ली के हौज काजी इलाके में इमारत ढहने के हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। अजमेरी गेट स्थित सत्तारा गली में चल रहे बचाव अभियान के दौरान शनिवार को मलबे से एक और शव बरामद किया गया।

मृतक की अभी पहचान नहीं हो पाई है। शव को एंबुलेंस से डॉ. लोकनायक जयप्रकाश नारायण (एलएनजेपी) अस्पताल भेज दिया गया है, जहां आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास गली सितारा में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत गुरुवार सुबह करीब 9.45 बजे ढह गई थी। हादसे के बाद से ही मौके पर बचाव अभियान लगातार जारी है।

इससे पहले करीब 48 घंटे के अभियान में मलबे से पांच लोगों को निकाला गया था, जिनमें तीन मृतक और दो घायल शामिल थे। अब चौथे शव की बरामदगी के बाद राहत और बचाव दल ने अभियान और तेज कर दिया है।

घटनास्थल पर अभी भी मलबा हटाने का काम चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार, बचाव अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक मलबे में किसी और के दबे होने की आशंका पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती।

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