- 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की जांच – बुराड़ी, कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन और आजादपुर सहित कई इलाकों में बच्ची की मूवमेंट को ट्रेस किया गया।
- DTC बस और दिल्ली मेट्रो के सीसीटीवी फुटेज के बारीक विश्लेषण से पुलिस को बच्ची की लोकेशन ट्रैक करने में मदद मिली।
- ऑटो-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन नंबर, UPI ट्रांजेक्शन, सोशल मीडिया क्लू और लोकल इंटेलिजेंस से मिली अहम सफलता।
- बच्ची को कानूनी औपचारिकताओं के बाद सकुशल परिवार से मिलाया गया, माता-पिता को मिली बड़ी राहत।
- घटना का विवरण:
निहारिका भट्ट डीसीपी नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के मुताबिक बीते 23.अक्तूबर 2026 को थाना बुराड़ी, दिल्ली में FIR No. 765/2026, धारा 137(2) BNS के तहत एक मामला दर्ज किया गया। नथुपुरा, बुराड़ी निवासी एक महिला ने शिकायत दी थी कि उनकी 13 वर्षीय बेटी 22.10.2026 की शाम से अपने घर से लापता है।
मामले की संवेदनशीलता और नाबालिग की सुरक्षा को देखते हुए उत्तर जिला पुलिस ने तुरंत बच्ची की तलाश के लिए सघन अभियान शुरू किया।
बच्ची को जल्द से जल्द ट्रेस करने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम का नेतृत्व SI विकाश फागेरिया, इंचार्ज PP गवर्नमेंट हॉस्पिटल बुराड़ी ने किया, जिसमें ASI प्रमोद, ASI सुधीर सांगवान, HC संजय, HC मोहित, HC विशाल, HC चेत राम, HC धर्मेंद्र और Ct. दीपक शामिल थे। इस टीम की निगरानी Insp. गिरीश चंद्र रतूड़ी, SHO/PS बुराड़ी और मार्गदर्शन श्री मनोज कुमार, ACP/बुराड़ी द्वारा किया गया।
टीम ने व्यापक सीसीटीवी विश्लेषण, तकनीकी जांच, सार्वजनिक परिवहन मार्गों की जांच, सोशल मीडिया लीड और स्थानीय पूछताछ के जरिए बच्ची की गतिविधियों का पता लगाया। जांच के दौरान बुराड़ी, DTC बस रूट, कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन और आजादपुर में लगे 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई।
जांच के अहम पड़ाव:
- सीसीटीवी से शुरुआती मूवमेंट का पता चला:
सबसे पहले नथुपुरा स्थित बच्ची के घर के आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई, जिसमें वह पास के बस स्टॉप की ओर जाती और DTC बस में सवार होती दिखी। संबंधित रूट पर चलने वाली DTC बसों का विवरण प्राप्त कर बस के सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई, जिससे पता चला कि बच्ची निरंकारी में उतरी थी। - कालकाजी में देखे जाने का क्लू:
इसी दौरान शिकायतकर्ता के एक रिश्तेदार से सूचना मिली कि लापता बच्ची को कालकाजी में देखा गया है। फुटेज चेक करने पर पता चला कि लापता बच्ची के साथ एक और लड़की थी और दोनों बाद में कालकाजी मंदिर मेट्रो स्टेशन में दाखिल हुई थीं। - मेट्रो फुटेज से कश्मीरी गेट तक का सुराग:
पुलिस टीम ने मेट्रो सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया और दिल्ली मेट्रो अधिकारियों से समन्वय किया। जांच में सामने आया कि दोनों लड़कियां कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन पर उतरीं, जहाँ से उन्होंने एक ऑटो-रिक्शा लिया। - ऑटो और UPI ट्रांजेक्शन से मिला ब्रेकथ्रू:
सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच कर टीम ने ऑटो-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन नंबर पता लगाया और उसके चालक को ट्रेस किया। पूछताछ में चालक ने बताया कि उसने दोनों लड़कियों को आजादपुर में छोड़ा था और उनमें से एक ने UPI के जरिए किराया चुकाया था। इस UPI ट्रांजेक्शन से पुलिस को साथ वाली लड़की की पहचान करने में अहम सुराग मिला। - सोशल मीडिया और स्थानीय पूछताछ से बच्ची बरामद:
जांच में मिले इनपुट पर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने आजादपुर क्षेत्र से जुड़े सोशल मीडिया प्रोफाइल्स की जांच की। इसी दौरान साथ वाली लड़की आजादपुर के एक पार्क में देखी गई। टीम ने तुरंत इस लीड पर कार्रवाई करते हुए आसपास के इलाके में गहन स्थानीय पूछताछ की। इन संयुक्त प्रयासों से अंततः 13 वर्षीय लापता बच्ची को सफलतापूर्वक ट्रेस कर लिया गया।
घर छोड़ने का कारण:
पूछताछ के दौरान बच्ची ने बताया कि उसने गलती से एक व्यक्ति को फोन कर दिया था और जब उस व्यक्ति ने उसके माता-पिता को बताने की बात कही तो वह डर गई। इसी डर से वह घर छोड़कर दिल्ली में घूमती रही, जहाँ उसकी मुलाकात एक दूसरी लड़की से हुई, जो नाबालिग बच्ची को अपने घर ले गई।
“ऑपरेशन मिलाप” के तहत सकुशल मिलन:
सफलतापूर्वक ट्रेस किए जाने के बाद, सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं और सत्यापन के बाद नाबालिग बच्ची को “ऑपरेशन मिलाप” के तहत सकुशल उसके माता-पिता से मिलाया गया।
यह सफल ऑपरेशन बच्चों की सुरक्षा के प्रति उत्तर जिला पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बारीक सीसीटीवी विश्लेषण, तकनीकी जांच और समन्वित पुलिस प्रयासों से नाबालिग बच्ची की सुरक्षित बरामदगी सुनिश्चित हुई, जो लापता बच्चों को उनके परिवारों से मिलाने के लिए दिल्ली पुलिस के समर्पण की पुष्टि करता है।
मामले में आगे की जांच जारी है।