दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 10 लाख की हेराफेरी का मामला 12 घंटे में सुलझाया

नई दिल्ली, 06.09.2026

राजधानी दिल्ली में नौकर द्वारा विश्वासघात कर 10 लाख रुपये की हेराफेरी के मामले को थाना डीबीजी रोड पुलिस ने मात्र 12 घंटे के भीतर सुलझाते हुए आरोपी को अंतरराज्यीय पीछा कर गिरफ्तार कर लिया है। पूरी रकम भी बरामद कर ली गई है।

मध्य जिला पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह (IPS) ने बताया कि आरोपी की पहचान नीरज (29), निवासी करोल बाग, दिल्ली के रूप में हुई है।

क्या था मामला?

दिनांक 03.सितंबर 2026 को करोल बाग में मोबाइल फोन के थोक व्यापारी शिकायतकर्ता ने अपने कर्मचारी नीरज को गली नंबर 10, जोशी रोड, करोल बाग स्थित एक क्लाइंट से पेमेंट लेने भेजा था।

शाम करीब 4:30 बजे नीरज ने क्लाइंट से 10 लाख रुपये नकद वसूले और अपना मोबाइल फोन बंद कर पूरी रकम लेकर फरार हो गया। शिकायतकर्ता ने उसके घर और परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला।

इस संबंध में eFIR No. 80074516/2026 दिनांक 04.09.2026 धारा 303(2) BNS के तहत थाना डीबीजी रोड में मामला दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता के विस्तृत बयान के बाद मामले में धारा 316(4) BNS जोड़ी गई।

इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से देहरादून में लोकेशन ट्रेस

जांच के दौरान पता चला कि आरोपी अपना मोबाइल फोन बीच-बीच में चालू कर रहा था। तकनीकी विश्लेषण में उसकी आखिरी लोकेशन देहरादून में मिली।

रकम बड़ी होने और उसके खर्च हो जाने की आशंका को देखते हुए थाना अध्यक्ष, थाना डीबीजी रोड के निर्देशन और एसीपी पहाड़गंज के समग्र पर्यवेक्षण में तुरंत एक टीम गठित की गई। टीम में IO/SI राहुल मेहता, HC सुनीत और L/Ct रितु शामिल थे।

टीम ने बिना समय गंवाए इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस को सक्रिय किया और रातों-रात देहरादून के लिए रवाना हो गई। देहरादून में तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस ने लगभग 25-30 होटलों में सघन तलाशी अभियान चलाया। लगातार प्रयास के बाद आरोपी को देहरादून के एक होटल से दबोच लिया गया।

पूछताछ में खुलासा, 10 लाख की पूरी रकम सुरक्षित

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने 10 लाख में से 8 लाख रुपये अपने बैंक अकाउंट में जमा कर दिए थे ताकि बैंक लोन चुकाया जा सके। शेष 2 लाख रुपये नकद उसने बुराड़ी, दिल्ली स्थित अपने किराए के कमरे में छिपा कर रखे थे।

पुलिस ने आरोपी के बुराड़ी स्थित कमरे से 2 लाख रुपये नकद बरामद कर लिए हैं, जबकि 8 लाख रुपये जो बैंक खाते में जमा किए गए थे, उन्हें ट्रेस कर डेबिट-फ्रीज करा दिया गया है, ताकि आरोपी उसे निकाल या खर्च न कर सके। इस प्रकार पूरी 10 लाख की रकम सुरक्षित कर ली गई है।

जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले साल करीब 6 महीने तक शिकायतकर्ता के पास काम कर चुका था और घटना से करीब एक महीने पहले ही उसने दोबारा नौकरी ज्वाइन की थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं मिला है।

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