शास्त्री नगर, दिल्ली निवासी शिकायतकर्ता ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई कि फेसबुक पर ब्राउज़ करते समय उन्हें एक प्रतिष्ठित बैंक के नाम से क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने का विज्ञापन मिला। विज्ञापन को असली समझकर उन्होंने निर्देशानुसार जरूरी विवरण भर दिए।
इसके बाद उन्हें एक व्यक्ति का फोन आया जिसने खुद को बैंक अधिकारी बताया और क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने पर चर्चा की। कॉलर की बातों पर भरोसा कर शिकायतकर्ता ने बताए गए निर्देशों का पालन किया, जिससे उन्हें ₹2,28,787 का नुकसान हुआ।
तदनुसार, साइबर थाना, उत्तर-पश्चिम जिला में E-FIR सं. 98/2026 दिनांक 25.03.2026, धारा 318(4) BNS के तहत मामला दर्ज किया गया। घटनास्थल साइबर थाना, उत्तर जिला के क्षेत्राधिकार में आने के कारण केस ट्रांसफर कर जांच शुरू की गई।
मधुर वर्मा, IPS, संयुक्त पुलिस आयुक्त , सेंट्रल रेंज ने बताया कि जांच के दौरान ठगी गई रकम के वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण किया गया, जिसमें सामने आया कि रकम रेजरपे से जुड़े वॉलेट/अकाउंट में भेजी गई थी। इसके बाद KYC विवरण व अन्य डिजिटल साक्ष्य प्राप्त कर उनका गहन परीक्षण किया गया।
मोबाइल नंबर, IMEI, डिजिटल फुटप्रिंट, IP लॉग और वित्तीय लेन-देन का तकनीकी विश्लेषण किया गया। जांच में राहुल पंडित की संलिप्तता सामने आई। लगातार तकनीकी निगरानी, वित्तीय ट्रेल विश्लेषण और फील्ड जांच के बाद पुलिस टीम देहरादून, उत्तराखंड पहुंची और राहुल पंडित को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में राहुल पंडित ने खुलासा किया कि उसने प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड जयवीर सिंह ठाकुर से लिए थे, जो देहरादून में एयरटेल में टेरिटरी सेल्स एसोसिएट (TSA) के पद पर कार्यरत था। सूचना पर जाल बिछाकर जयवीर सिंह ठाकुर को 06 प्री-एक्टिवेटेड एयरटेल सिम कार्ड की डिलीवरी करते समय गिरफ्तार किया गया।
टीम, जांच और ऑपरेशन
इंस्पेक्टर रोहित गहलोत, SHO/साइबर थाना, उत्तर जिला के पर्यवेक्षण और श्री विशेष दत्तरवाल, ACP/ऑपरेशन सेल, उत्तर जिला के मार्गदर्शन में साइबर थाना, उत्तर जिला की एक समर्पित टीम का गठन किया गया। टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर शिव देव सिंह कर रहे थे, जिसमें HC अजय, Ct. आकाश और HC भरत (CDR सेक्शन, ऑपरेशन सेल) शामिल थे।
सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमति लेकर पुलिस टीम जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उत्तराखंड रवाना हुई। निरंतर प्रयासों और गहन जांच से पुलिस टीम ने देहरादून, उत्तराखंड से राहुल पंडित, जयवीर सिंह ठाकुर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
लगातार पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों से साइबर धोखाधड़ी में उनकी संलिप्तता और अन्य संदिग्धों के साथ संबंध के बारे में पूछा गया।
आरोपी राहुल पंडित ने बताया कि वह प्रतिष्ठित बैंकों का रूप धारण कर फेसबुक पर स्पॉन्सर्ड विज्ञापन चलाता था और क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने की सेवा देता था। अनजान पीड़ित ऑनलाइन फॉर्म भरकर अपनी निजी और बैंकिंग जानकारी साझा कर देते थे।
पीड़ितों द्वारा दी गई जानकारी का इस्तेमाल कर राहुल बैंक प्रतिनिधि बनकर उन्हें कॉल करता था। उसके पास पहले से पीड़ित की बुनियादी जानकारी होने के कारण उसकी बातें असली लगती थीं, जिससे पीड़ित आसानी से जाल में फंस जाते थे।
पीड़ित का विश्वास जीतने के बाद वह बैंकिंग एप्लिकेशन के नाम पर एक APK फाइल भेजता था। इंस्टॉल होने पर APK से आरोपी को पीड़ित के मोबाइल पर रिमोट एक्सेस मिल जाता था। इसके बाद आरोपी पीड़ित के क्रेडिट कार्ड विवरण और उपलब्ध क्रेडिट लिमिट का इस्तेमाल कर अनधिकृत लेन-देन करता था।
पहचान छिपाने के लिए आरोपी सह-आरोपी जयवीर सिंह ठाकुर से लिए गए प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड का इस्तेमाल करता था। जयवीर एयरटेल TSA के पद पर रहते हुए अवैध रूप से ऐसे सिम कार्ड की आपूर्ति करता था।
पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर सिंडिकेट से जुड़े अन्य सहयोगियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए देहरादून और रुड़की, उत्तराखंड में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की गई।
इसके बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया और तिहाड़ जेल, दिल्ली में बंद किया गया।
आरोपी राहुल पंडित के कब्जे से 04 मोबाइल फोन, आरोपी जयवीर सिंह ठाकुर के कब्जे से 1मोबाइल फोन और 06 एयरटेल सिम कार्ड (प्री-एक्टिवेटेड) बरामद हुआ है।
बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल उपकरणों की इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य निकालने और साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़े अतिरिक्त पीड़ितों, लाभार्थियों व सहयोगियों की पहचान के लिए जांच की जा रही है।
अपराध में शामिल पूरे नेटवर्क की पहचान, अतिरिक्त लाभार्थी खातों का पता लगाने और साइबर धोखाधड़ी सिंडिकेट से जुड़े अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। बाकी आरोपियों को पकड़ने और अपराध से अर्जित संपत्ति की रिकवरी के प्रयास जारी हैं।