टी.बी. से जुड़े सवाल – डॉ. एस. के. अरोड़ा के साथ : टी.बी. और गर्भावस्था

हर होने वाली मां को क्या जानना चाहिए?

जानिए जरूरी सवाल जवाब

प्रश्न 1. क्या गर्भावस्था के दौरान महिला को टी.बी. हो सकती है?
उत्तर: हाँ। गर्भावस्था टी.बी. से सुरक्षा नहीं देती। गर्भावस्था के दौरान कुछ सामान्य लक्षणों—जैसे थकान, कमजोरी या भूख में कमी—को सामान्य मान लिया जाता है, जिसके कारण टी.बी. की पहचान में देरी हो सकती है।
इसलिए लगातार बने रहने वाले या असामान्य लक्षणों को केवल गर्भावस्था का हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 2. गर्भावस्था में किन लक्षणों पर टी.बी. का संदेह करना चाहिए?
उत्तर: लगातार खांसी, लंबे समय तक बुखार, रात में पसीना आना, बिना कारण वजन कम होना, भूख कम लगना और असामान्य कमजोरी जैसे लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए। यदि ऐसे लक्षण लगातार बने रहें, तो चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है।

प्रश्न 3. क्या गर्भवती महिला की टी.बी. की जांच की जा सकती है?
उत्तर: हाँ। गर्भावस्था टी.बी. की जांच में बाधा नहीं होनी चाहिए। डॉक्टर लक्षणों और चिकित्सकीय जांच के आधार पर आवश्यक परीक्षण कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर छाती का एक्स-रे और उपयुक्त molecular tests भी किए जा सकते हैं।

प्रश्न 4. क्या गर्भावस्था में Chest X-ray कराया जा सकता है?
उत्तर: यदि चिकित्सकीय रूप से आवश्यक हो, तो केवल गर्भावस्था के कारण Chest X-ray को अनावश्यक रूप से टालना नहीं चाहिए। डॉक्टर आवश्यक सावधानियों के साथ जांच कराने का निर्णय लेते हैं।
कई बार टी.बी. के निदान में देरी का जोखिम, आवश्यक जांच कराने के जोखिम से अधिक हो सकता है।

प्रश्न 5. क्या गर्भावस्था में टी.बी. का इलाज किया जा सकता है?
उत्तर: हाँ। गर्भावस्था टी.बी. का इलाज न करने का कारण नहीं है। अनुपचारित टी.बी. मां के स्वास्थ्य के साथ-साथ गर्भावस्था और बच्चे के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
लेकिन कौन-सी दवाएं और कौन-सा regimen दिया जाए, यह टी.बी. के प्रकार, drug-susceptibility pattern, गर्भावस्था की अवधि और महिला की अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए इलाज हमेशा चिकित्सकीय निगरानी में होना चाहिए।

प्रश्न 6. क्या गर्भावस्था पता चलने पर टी.बी. की दवाएं बंद कर देनी चाहिए?
उत्तर: नहीं। अपने आप दवाएं बंद नहीं करनी चाहिए।
यदि कोई महिला टी.बी. का इलाज ले रही है और उसे गर्भावस्था का पता चलता है, तो उसे तुरंत अपने डॉक्टर को बताना चाहिए। डॉक्टर दवाओं और उपचार योजना की समीक्षा करेंगे और मां तथा भ्रूण के लिए लाभ-जोखिम का आकलन करेंगे।
विशेषकर Drug-Resistant TB में उपचार का निर्णय विशेषज्ञ टीम द्वारा किया जाना चाहिए। भारत की वर्तमान DR-TB guidelines में गर्भवती महिलाओं के लिए obstetrician तथा TB/respiratory physician की संयुक्त देखरेख पर जोर दिया गया है।

प्रश्न 7. क्या मां की टी.बी. बच्चे को हो सकती है?
उत्तर: गर्भावस्था के दौरान मां से बच्चे में टी.बी. का संक्रमण सामान्यतः सीधे नहीं होता, लेकिन दुर्लभ परिस्थितियों में congenital TB हो सकती है।
अधिक महत्वपूर्ण यह है कि यदि मां को infectious pulmonary TB है, तो जन्म के बाद निकट संपर्क के कारण नवजात को संक्रमण का जोखिम हो सकता है। इसलिए समय पर मां का इलाज, संक्रमण नियंत्रण और आवश्यकता के अनुसार नवजात की जांच अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 8. क्या टी.बी. से पीड़ित मां अपने बच्चे को स्तनपान करा सकती है?
उत्तर: अधिकांश परिस्थितियों में स्तनपान जारी रखा जा सकता है, जबकि मां उचित टी.बी. उपचार ले रही हो। यदि मां infectious pulmonary TB से पीड़ित है, तो स्वास्थ्यकर्मी द्वारा बताए गए infection-control उपायों का पालन करना आवश्यक है।
Drug-resistant TB के कुछ उपचारों में स्थिति अलग हो सकती है, इसलिए ऐसे मामलों में विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है।

प्रश्न 9. क्या गर्भावस्था में TB की जांच antenatal care का हिस्सा होनी चाहिए?
उत्तर: भारत जैसे उच्च TB burden वाले देश में यह महत्वपूर्ण है कि antenatal care के दौरान महिला के TB risk और symptoms पर भी ध्यान दिया जाए।

प्रश्न 10. परिवार को क्या सावधानी रखनी चाहिए यदि गर्भवती महिला को TB हो?
उत्तर:
परिवार को महिला को दोष देने या डराने के बजाय उसके इलाज में सहयोग करना चाहिए। यदि pulmonary TB infectious है, तो डॉक्टर द्वारा बताए गए ventilation, cough etiquette और अन्य infection-control उपायों का पालन करना चाहिए।
घर के निकट संपर्क में रहने वाले लोगों और नवजात को भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार TB screening की आवश्यकता हो सकती है।

डॉ. एस. के. अरोड़ा की सलाह :

“गर्भावस्था टी.बी. की जांच या उचित उपचार को टालने का कारण नहीं है। लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना या अन्य संदिग्ध लक्षणों को केवल गर्भावस्था के सामान्य लक्षण मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर पहचान और उचित उपचार मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकता है। और सबसे महत्वपूर्ण—टी.बी. की दवाएं अपने आप बंद या बदलें नहीं।”

“तंबाकू छोड़ें → टी.बी. रोकें → जीवन बचाएँ”

डॉ. एस.के. अरोड़ा
सीनियर चेस्ट विशेषज्ञ,कंसल्टेंट,
पूर्व दिल्ली स्टेट टीबी हेड, दिल्ली सरकार (डब्ल्यूएचओ द्वारा सम्मानित)
TB Expert | Tobacco Control Advocate | Public Health (India).

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