नई दिल्ली | विशेष संवाददाता
राजधानी दिल्ली के टूरिज्म डिपार्टमेंट में फैले भ्रष्टाचार और लापरवाही की पोल अब खुलकर सामने आ रही है। मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड में 23 लोगों की जान जाने के बावजूद दिल्ली प्रशासन और टूरिज्म विभाग ने चुप्पी साध रखी है। बड़ा सवाल यह है कि नियमों को ताक पर रखकर कब तक जान-माल से खिलवाड़ होता रहेगा?
बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम:
कागज पर बंद, जमीन पर चालू
दिल्ली सरकार की ओर से पहले बयान आया था कि ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम’ को वापस ले लिया गया है। इसके बावजूद राजधानी में सैकड़ों B&B यूनिट्स होटल की तर्ज पर धड़ल्ले से चल रहे हैं। न कोई जांच, न कोई कानूनी कार्रवाई। आखिर किसके संरक्षण में ये अवैध कारोबार फल-फूल रहा है?
जब हमारे संवाददाता ने टूरिज्म डिपार्टमेंट के वरिष्ठ अधिकारियों से सवाल किया तो जवाब टालमटोल भरा रहा। कोई कहता है “फाइल एसडीएम के पास है”, तो कोई “पुलिस कार्रवाई करेगी”। लेकिन हकीकत यह है कि जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं। मालवीय नगर हादसे के बाद भी टूरिज्म डिपार्टमेंट के किसी अधिकारी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
23 मौतें भी नहीं जगा सकीं सरकार को
मालवीय नगर अग्निकांड में 23 बेगुनाहों ने दम तोड़ दिया। बिल्डिंग में न फायर NOC थी, न सुरक्षा इंतजाम। हादसे के बाद कुछ दिन बयानबाजी हुई, नेताओं ने घटनास्थल के दौरे किए और फिर सिस्टम पुराने ढर्रे पर लौट आया। दर्द सिर्फ उन परिवारों को है जिन्होंने अपनों को खोया। बाकी के लिए यह महज एक और “फाइल” बनकर रह गई।
पहाड़गंज में B&B की आड़ में काला कारोबार
सबसे चौंकाने वाले आरोप पहाड़गंज से आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ के नाम पर यहां जिस्मफरोशी तक का धंधा चल रहा है।
नियमों की खुलेआम धज्जियां:
- अवैध निर्माण: अधिकतर भवनों के पास न फायर NOC है, न बिल्डिंग प्लान पास।
- . होटल की तरह संचालन: मकान मालिकों ने 3-4 लाख रुपये महीने की लीज पर पूरी बिल्डिंग दे रखी है।
- स्कीम का उल्लंघन: B&B स्कीम में शर्त है कि मालिक परिवार सहित वहीं रहेगा, लेकिन कोई भी मालिक यूनिट में नहीं रहता।
- . संदिग्ध भूमिका: आरोप है कि टूरिज्म विभाग के अधिकारी हर महीने मोटी रकम लेकर इन अवैध यूनिट्स को संरक्षण दे रहे हैं। शिकायतें फाइलों में दबा दी जाती हैं।
स्थानीय लोगों में गुस्सा :
पहाड़गंज रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन एवम् स्थानीय लोगों का कहना है, “हम सालों से शिकायत कर रहे हैं। लेकिन टूरिज्म विभाग को हर महीने पैसा पहुंच जाता है, इसलिए कोई छापा नहीं पड़ता। अगर सरकार में हिम्मत है तो इन फर्जी B&B यूनिट्स को बंद करके दिखाए।”
क्या थी B&B स्कीम?
दिल्ली सरकार ने पर्यटकों को ‘घर जैसा माहौल’ देने के लिए यह स्कीम शुरू की थी। नियम था कि मालिक अपने घर में 1 से 6 कमरे दे सकता है, लेकिन खुद परिवार के साथ वहीं रहेगा। कोई कमर्शियल होटल जैसी सुविधा नहीं होगी। मगर आज ये यूनिट्स पूरी तरह होटल बन चुकी हैं।
सरकार से 4 बड़े सवाल
- मालवीय नगर हादसे के बाद दिल्ली की सभी B&B यूनिट्स का फायर और बिल्डिंग सेफ्टी ऑडिट क्यों नहीं हुआ?
- . टूरिज्म डिपार्टमेंट ने पिछले 1 साल में कितनी यूनिट्स का फिजिकल वेरिफिकेशन किया?
- . बिना मालिक के चल रही यूनिट्स के लाइसेंस अब तक रद्द क्यों नहीं किए गए?
- . भू स्वामी द्वारा 3-4 लाख की लीज वसूली कर लीज पर चल रहे यूनिट्स पर इनकम टैक्स और GST की जांच कब होगी?
फिलहाल दिल्ली सरकार और टूरिज्म मंत्री की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन जमीनी हकीकत यही बता रही है कि विभाग में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं।
अब देखना यह है कि सरकार सिर्फ बयानबाजी करती है या 23 जिंदगियों की कीमत पर कोई सख्त एक्शन लेती है।
नोट: यह खबर संवाददाता द्वारा जुटाए गए तथ्यों और स्थानीय लोगों के बयानों पर आधारित है।