दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों के 2 प्रमुख सहयोगियों को किया गिरफ्तार, 1 हाई-एंड सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल व 1 देशी पिस्टल (CMP) सहित 06 जिंदा कारतूस बरामद, एक दर्जन से अधिक जघन्य मामलों में शामिल पाए गए

एआरएससी, अपराध शाखा की एक टीम, जिसका नेतृत्व निरीक्षक मान सिंह व निरीक्षक सुंदर गौतम द्वारा किया गया और श. संजय कुमार नागपाल, एसीपी/एआरएससी के निकट पर्यवेक्षण में, कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों के दो प्रमुख संचालकों जतिन भारद्वाज @ नन्नू पुत्र संजय भारद्वाज, निवासी राजपुरा, पंजाब, उम्र- 28 वर्ष और सुखविंदर सिंह @ बग्गा पुत्र बलविंदर सिंह, निवासी राजपुरा, पंजाब, उम्र- 28 वर्ष ,को गिरफ्तार किया है।

एच.जी.एस. ढालीवाल, आईपीएस, विशेष पुलिस आयुक्त, क्राइम ब्रांच ने बताया कि पिछले 2–3 महीनों से एआरएससी, अपराध शाखा की एक समर्पित टीम उन मामलों पर लगातार काम कर रही थी जिनमें विदेश में बैठे गैंगस्टरों द्वारा व्यापारियों को जबरन वसूली के लिए कॉल की जा रही थी। सोशल मीडिया पर जबरन वसूली कॉल और जिम्मेदारी लेने के दावों के बाद टीम ने व्यापक तकनीकी निगरानी व फील्ड सत्यापन किया।

सत्यापन के दौरान दर्जनों आपराधिक मामलों में पहले से संलिप्त कई संदिग्धों की पहचान की गई। ये व्यक्ति विदेश में बैठे गैंगस्टरों को लॉजिस्टिक सपोर्ट दे रहे थे और उनके निर्देश पर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। कुछ व्यक्ति जैंजी, सिग्नल जैसे अत्याधुनिक कम्युनिकेशन ऐप के जरिए विदेश स्थित गैंगस्टर के संपर्क में भी पाए गए।

दिनांक 24.06.2026 को सूचना मिली कि गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों से जुड़ा अपराधी जतिन @ नन्नू किसी जघन्य अपराध को अंजाम देने के लिए रोहिणी, दिल्ली क्षेत्र में आएगा।

सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए गुप्त मुखबिर के इशारे पर बहादुर शाह मार्ग, पंसाली चौक, रोहिणी, दिल्ली में जाल बिछाया गया। रात करीब 10:50 बजे एक संदिग्ध को पकड़ा गया जिसकी पहचान उपरोक्त आरोपी जतिन भारद्वाज @ नन्नू के रूप में हुई। आरोपी की तलाशी लेने पर उसके कब्जे से 01 सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल व 4 जिंदा कारतूस बरामद हुए।

इसके बाद कानूनी कार्रवाई शुरू की गई और आरोपी को थाना अपराध शाखा, दिल्ली में दर्ज एफआईआर संख्या 173/26 दिनांक 25.06.2026, धारा 25/54/59 शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया।

जांच में पता चला कि जतिन भारद्वाज का जन्म 1998 में राजपुरा, पंजाब में हुआ था। उसने 5वीं कक्षा तक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। वह गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों व सह-आरोपी सुखविंदर सिंह @ बग्गा को बचपन से जानता है क्योंकि वे एक ही इलाके में रहते हैं। वह नशे का आदी है और गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों व उसके सहयोगी सुखविंदर सिंह @ बग्गा के लिए काम करता था। वह 2014 से 2025 के दौरान पंजाब व हरियाणा के विभिन्न थानों के चोरी, सेंधमारी, झपटमारी, शस्त्र अधिनियम, एनडीपीएस अधिनियम आदि के 14 मामलों में पहले भी संलिप्त पाया गया है।

वही आरोपी सुखविंदर सिंह @ बग्गा का जन्म 1998 में राजपुरा, पंजाब में हुआ था। उसने 8वीं कक्षा तक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। वह नशे का आदी है और विदेश में बैठा गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों उसका बचपन का दोस्त है। आरोपी गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों के निर्देश पर उसके गैंग के सदस्यों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देता था। वह गोल्डी ढिल्लों के शूटरों को छिपने की जगह भी उपलब्ध कराता था। जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी ने प्रतिद्वंद्वी नशा सप्लायरों को डरा-धमकाकर और प्रतिस्पर्धा खत्म कर इलाके में अपने आपराधिक नेटवर्क का वर्चस्व स्थापित किया। कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों के नाम पर धमकी, जबरदस्ती व प्रतिशोध के डर से उसने यह सुनिश्चित किया कि स्थानीय नशा उपयोगकर्ता व पेडलर केवल उसके नेटवर्क से ही एनडीपीएस पदार्थ खरीदें। किसी भी व्यक्ति द्वारा प्रतिद्वंद्वी सप्लायरों से खरीदने या डील करने पर गंभीर परिणाम की धमकी दी जाती थी। नतीजतन, आरोपी ने अवैध एनडीपीएस व्यापार पर एकाधिकार बना लिया, जिससे वह वितरण को नियंत्रित कर गैंगस्टर गतिविधियों के लिए अवैध मुनाफा कमाता था। वह 2016 से 2025 के दौरान पंजाब के विभिन्न थानों के चोरी, सेंधमारी, झपटमारी, शस्त्र अधिनियम, एनडीपीएस अधिनियम आदि के 07 मामलों में पहले भी संलिप्त पाया गया है।

इसके बाद बरामद हथियार के स्रोत सुखविंदर @ बग्गा को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया और उसकी निशानदेही पर 01 देशी पिस्टल व 2 जिंदा कारतूस बरामद किए गए।

गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों को संगठित अपराध नेटवर्क से जुड़े सबसे प्रभावशाली व साधन-संपन्न अपराधियों में से एक माना जाता है। मुख्य रूप से भारत के बाहर से विश्वसनीय सहयोगियों के नेटवर्क के माध्यम से काम करते हुए, वह कथित तौर पर लक्षित हिंसा, जबरन वसूली, धमकी, अवैध हथियार खरीद, नशीले पदार्थों की तस्करी व स्थानीय अपराधियों की भर्ती सहित कई आपराधिक गतिविधियों का समन्वय करता है। उसका आपराधिक सिंडिकेट कथित तौर पर अत्यधिक विभाजित संरचना के माध्यम से कार्य करता है, जिससे वह परिचालन गोपनीयता बनाए रखते हुए दूर से निर्देश जारी कर सकता है। संगठन कथित तौर पर एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म, वर्चुअल नंबर, वीपीएन सेवाओं व अन्य तकनीकी साधनों पर निर्भर करता है ताकि पता लगाने से बचा जा सके और कानून प्रवर्तन जांच में बाधा डाली जा सके। सिंडिकेट अक्सर स्थानीय गैंग के सदस्यों व कमजोर युवाओं का शोषण करता है, उन्हें आपराधिक कृत्यों को अंजाम देने के लिए वित्तीय प्रलोभन, हथियार व लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रदान करता है।

गोल्डी ढिल्लों ने आपराधिक पारिस्थितिकी तंत्र में भय व वर्चस्व की छवि बनाई है। उसके नाम का कथित तौर पर प्रतिद्वंद्वियों को डराने, व्यापारियों से जबरन वसूली करने, गवाहों को प्रभावित करने व प्रतिस्पर्धी गिरोहों पर वर्चस्व स्थापित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उसकी मांगों का पालन करने से इनकार करने वाले व्यक्तियों को कथित तौर पर धमकियों, हिंसक प्रतिशोध या उसके सहयोगियों द्वारा अन्य प्रकार के जबरदस्ती का सामना करना पड़ता है।

सिंडिकेट के अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय आपराधिक तत्वों से संबंध माने जाते हैं, जो अवैध हथियारों, नशीले पदार्थों, वित्त व ऑपरेटिव्स की आवाजाही को अधिकार क्षेत्रों में सक्षम बनाता है। इसकी विकेंद्रीकृत लेकिन समन्वित कार्यप्रणाली महत्वपूर्ण जांच चुनौतियां पेश करती है और सार्वजनिक व्यवस्था व राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है।

जांच के दौरान यह भी पता चला कि गोल्डी ढिल्लों ने कथित तौर पर अपने सहयोगियों द्वारा धमकी, धमकियों व हिंसा के कृत्यों के माध्यम से प्रतिस्पर्धा को खत्म कर पंजाब में अवैध हथियार तस्करी व एनडीपीएस व्यापार पर वर्चस्व स्थापित करने व बनाए रखने की कोशिश की है। उसके सिंडिकेट का कथित तौर पर अवैध हथियारों व नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव रहा है, जो स्थानीय अपराधियों व पेडलर्स को उसके नियंत्रण में काम करने या गंभीर परिणाम भुगतने के लिए मजबूर करता है। ऐसी गतिविधियों का कथित उद्देश्य अवैध व्यापार पर एकाधिकार बनाना व आपराधिक सिंडिकेट के वित्तीय आधार को मजबूत करना था।

हाल ही में, चंडीगढ़ में एक मेडिकल स्टोर मैनेजर की हत्या की जांच के दौरान भी गोल्डी ढिल्लों का नाम सामने आया है, जो उसके आपराधिक नेटवर्क की गंभीर अपराधों में कथित निरंतर संलिप्तता को दर्शाता है। इस घटना की जांच सिंडिकेट की व्यापक गतिविधियों के हिस्से के रूप में की जा रही है, जो संगठित अपराध व हिंसक आपराधिक गतिविधियों में कथित भूमिका के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जांच के दायरे में बार-बार आ चुका है।

इसके पास से एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल (.32 बोर),एक देशी पिस्टल, 6 जिंदा कारतूस, एक मोटरसाइकिल और 4 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।

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