नई दिल्ली: पश्चिमी जिले की एंटी-नारकोटिक्स स्क्वॉड ने जाली नोट छापने और सप्लाई करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से 500 और 100 रुपये के कुल 18,23,800 रुपये के जाली नोट बरामद किए हैं, जिनमें तैयार और अधबने नोट दोनों शामिल हैं। साथ ही नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला लैपटॉप, हार्ड डिस्क और प्रिंटिंग का सारा सामान भी जब्त किया गया है।
बीते 01 अक्टूबर 2026 को हेड कांस्टेबल प्रवीण और हेड कांस्टेबल विनोद जनकपुरी के C-2C ब्लॉक, गेट नंबर 2 के पास इलाके में गश्त पर थे। तभी एक संदिग्ध व्यक्ति पुलिस को देखकर भागने लगा। स्टाफ ने पीछा कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसकी पहचान अंकित कुमार (उम्र 25 वर्ष) के रूप में हुई। तलाशी लेने पर उसके पास से 500-500 के 250 जाली नोट, जिनकी कीमत 1,25,000 रुपये है, बरामद हुए। मौके पर ही FSL एक्सपर्ट ने नोटों की जांच कर उन्हें जाली करार दिया।
इस पर थाना जनकपुरी में FIR No. 409/2026 दिनांक 02.10.2026, धारा 179/180/61(2)/3(5) BNS के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए इंस्पेक्टर अमित धानी, प्रभारी एंटी-नारकोटिक्स स्क्वॉड और एसीपी ऑपरेशंस राजेश कुमार के नेतृत्व में तथा DCP पश्चिमी जिला हर्षेश्वर वी. स्वामी, IPS के पर्यवेक्षण में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम में SI संदीप दलाल, SI दीपक महला, SI चंदर शेखर, HC विनोद, HC प्रवीण, HC अनिल, HC विकास, Ct. अंकित, Ct. दीपक और Ct. विकास शामिल थे।
पूछताछ में अंकित ने बताया कि उसने ये जाली नोट पटेल नगर निवासी गगनदीप सिंह उर्फ मन्नी और कुलवंत सिंह उर्फ काके से लिए थे और वह इन्हें बेचने जा रहा था।
सूचना पर कार्रवाई करते हुए टीम ने 02.10.2026 को बलजीत नगर, पटेल नगर से गगनदीप सिंह उर्फ मन्नी (31 वर्ष) और कुलवंत सिंह उर्फ काके (44 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया।
उनकी निशानदेही पर मकान नंबर T-650, पहली मंजिल, गली नंबर 21, हनुमान मंदिर के पास, बलजीत नगर में किराए के कमरे में छापा मारा गया। वहां से 16,98,800 रुपये के तैयार और अधबने जाली नोट और छपाई का सामान बरामद हुआ।
जांच में मकान मालिक अमित (34 वर्ष) की भूमिका भी संदिग्ध मिली। पता चला कि उसे कमरे में चल रही गतिविधियों की जानकारी थी और बाद में वह भी इस धंधे में शामिल हो गया। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया।
वारदात का तरीका
पुलिस के मुताबिक, गगनदीप को पहले अपने मामा की प्रिंटिंग प्रेस में काम करने से प्रिंटिंग और डाई-कटिंग मशीन चलाने का अनुभव था, जबकि कुलवंत को ग्राफिक डिजाइनिंग और फोटोशॉप का ज्ञान था। दोनों ने अपने हुनर को मिलाकर किराए के कमरे में जाली नोट छापने का सेटअप तैयार किया।
आरोपियों ने यूट्यूब और इंटरनेट पर वीडियो देखकर नोट छापने की तकनीक सीखी। अमित ने कमरा किराए पर दिया और बाद में खुद भी इस काम में शामिल हो गया, जबकि अंकित जाली नोटों को आगे सप्लाई करने का काम करता था।
आरोपियों की प्रोफाइल
- अंकित कुमार (25 वर्ष), निवासी जनकपुरी: 12वीं तक पढ़ा है और पार्किंग अटेंडेंट का काम करता था। उसने गगनदीप से 50,000 रुपये देकर 2.50 लाख रुपये के जाली नोट खरीदे थे।
- गगनदीप सिंह उर्फ मन्नी (31 वर्ष), निवासी बलजीत नगर: अपने मामा की प्रिंटिंग प्रेस में काम कर चुका है। ऑनलाइन गेमिंग में आर्थिक नुकसान होने के बाद उसने कुलवंत के साथ मिलकर जाली नोट बनाना शुरू किया।
- कुलवंत सिंह उर्फ काके (44 वर्ष), निवासी बलजीत नगर: 9वीं तक पढ़ा है। पहले मोबाइल की दुकान और सिम कार्ड बेचने का काम करता था। उसे ग्राफिक डिजाइनिंग आती है। 2012 में फर्जी दस्तावेजों पर सिम जारी करने के मामले में गिरफ्तार हो चुका है।
- अमित (34 वर्ष), निवासी बलजीत नगर: 10वीं तक पढ़ा है। जुलाई 2026 में उसने 3,000 रुपये प्रति माह पर कमरा गगनदीप और कुलवंत को किराए पर दिया था और बाद में उनके साथ शामिल हो गया।
क्या-क्या बरामद हुआ
कुल 18,23,800 रुपये के जाली नोट (अंकित से 1,25,000 और किराए के कमरे से 16,98,800 रुपये)
एक लैपटॉप और एक हार्ड डिस्क, जिसमें जाली नोट छापने से जुड़ा डेटा मिला
प्रिंटिंग और प्रोसेसिंग का सामान – स्क्रीन-प्रिंटिंग फ्रेम, वॉटरमार्क डाई, कॉटन फाइबर शीट, सिक्योरिटी थ्रेड, हीट-लेमिनेटिंग मशीन, कलर प्रिंटर, स्याही, स्टेपर, कटर आदि
पुलिस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने के लिए जांच कर रही है कि नोट बनाने का कच्चा माल कहां से आया और ये नोट कहां-कहां सप्लाई होने थे।