नई दिल्ली, 03 जुलाई 2026
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने स्कूली बच्चों को सशक्त बनाने और सुरक्षित माहौल देने के उद्देश्य से ‘छात्र सुरक्षा एवं कानूनी जागरूकता आउटरीच कार्यक्रम’ की शुरुआत की है। जिले के विभिन्न स्कूलों में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत पुलिसकर्मी छात्रों को साइबर सुरक्षा, व्यक्तिगत सुरक्षा, कानूनी अधिकार, आत्मरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया के बारे में जागरूक कर रहे हैं।
इस अभियान के तहत आपातकालीन हेल्पलाइन की जानकारी छात्रों को दी गई। छात्रों को 112 (पुलिस आपात सहायता) और 1930 (साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत) नंबरों के महत्व के बारे में बताया गया। साथ ही साइबर सुरक्षा पर जोर देते हुए बताया गया कि जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार, ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग पर अनजान लोगों से सावधानी बरतने की सलाह दी गई। पासवर्ड, पता या लाइव लोकेशन साझा न करने के लिए कहा गया। बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’, बॉडी ऑटोनॉमी और ‘NO-GO-TELL’ सिद्धांत की जानकारी दी गई। अनुचित व्यवहार की तुरंत रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। नए कानूनों की जानकारी देते हुए बताया गया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के तहत ‘जीरो FIR’, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, पहचान की चोरी, ऑनलाइन स्टॉकिंग और फेक प्रोफाइल जैसे साइबर अपराधों के बारे में जागरूक रहे। प्रैक्टिकल स्थितिजन्य जागरूकता, बुनियादी आत्मरक्षा और आपात स्थिति में बचने के तरीके सिखाए गए। छात्रों को बताया गया कि खतरे की स्थिति में चिल्लाकर मदद मांगें और सुरक्षित स्थान पर जाएं।
कार्यक्रम के दौरान पुलिसकर्मियों ने बताया कि चैट, ईमेल, स्क्रीनशॉट, फोटो, ऑडियो और वीडियो जैसे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सबूत के तौर पर इस्तेमाल हो सकते हैं। छात्रों को महिलाओं और बच्चों के लिए बने कड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी गई।
अभियान में संवाद, प्रैक्टिकल डेमो और कॉन्फिडेंस-बिल्डिंग एक्सरसाइज भी शामिल हैं, जिससे छात्र खुलकर सवाल पूछ सके। इसका मकसद छात्रों, स्कूलों और पुलिस के बीच भरोसा मजबूत करना है।
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस का कहना है कि इस पहल के जरिए निवारक पुलिसिंग को बढ़ावा देकर युवाओं को ज्ञान, जागरूकता और व्यावहारिक सुरक्षा कौशल से लैस किया जा रहा है। जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार, कानूनी साक्षरता और समय पर अपराध की रिपोर्टिंग को बढ़ावा देकर पुलिस का लक्ष्य एक ऐसा सुरक्षित माहौल बनाना है जहां हर बच्चा फिजिकल और डिजिटल दुनिया दोनों में सुरक्षित महसूस करे।