दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की वेस्टर्न रेंज-II ने ₹30.06 लाख की अंतरराज्यीय साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क उजागर किया है। इस मामले में मुख्य हैंडलर उदित त्यागी (26 वर्ष) को जयपुर एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया है। वह थाईलैंड, मलेशिया और यूएई भाग गया था।
शिकायत: पीड़ित गौरव रुस्तोगी को व्हाट्सएप ग्रुप “HO30” और टेलीग्राम चैनल के जरिए फर्जी इन्वेस्टमेंट/ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर ज्यादा मुनाफे का लालच देकर ठगा गया। ई-एफआईआर नं. 27/2025, थाना क्राइम ब्रांच में केस दर्ज है।
जांच में खुलासा – 6 लेयर का सिंडिकेट:
पुलिस जांच में सामने आया कि यह कोई लोकल गैंग नहीं, बल्कि विदेशी ऑपरेटरों द्वारा चलाया जा रहा संगठित रैकेट है।
- विदेशी लेयर: चीनी/विदेशी डेवलपर्स फर्जी ऐप/वेबसाइट बनाते थे, जहां नकली बैलेंस और मुनाफा दिखाया जाता था।
- व्हाट्सएप लेयर: पार्ट टाइम जॉब और कमाई के नाम पर शिकार को ग्रुप में जोड़ना। ग्रुप “HO30” का संचालक हाकम अली (बीकानेर) गिरफ्तार।
- टेलीग्राम लेयर: फर्जी एडवाइजर बनकर पीड़ित से संपर्क और USDT-INR के रेट तय करना।
- ठगी का तरीका: पहले छोटा निवेश कराकर छोटा विड्रॉल देना, फिर बड़ा निवेश कराकर VIP फीस, टैक्स, मेंटेनेंस के नाम पर पैसा ऐंठना। 5. म्यूल अकाउंट लेयर: 18 से ज्यादा फर्स्ट लेयर बैंक खातों में पैसा घुमाया गया। मोनिश के फेडरल बैंक खाते में ₹5 लाख आए, जिसे अनीश और अक्षित सिरोही ऑपरेट करते थे। 6. क्रिप्टो लेयर: ठगी की रकम को USDT में बदलकर विदेशी ऑपरेटरों को भेजना, खाताधारकों को 10-15% कमीशन।
DCP हर्ष इंदौरा के नेतृत्व में ACP राज पाल डाबस की देखरेख और इंस्पेक्टर सतीश मलिक की टीम ने दिल्ली, यूपी और राजस्थान में छापेमारी की। NCRP डेटा में इन खातों से 35 से ज्यादा साइबर शिकायतों के लिंक मिले हैं। आरोपी का कनेक्शन राजकोट के ₹8.16 लाख के साइबर फ्रॉड केस (FIR 33/2026) से भी जुड़ा है।
आरोपियों के पास से 7 मोबाइल फोन, सिम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और डिजिटल सबूत।
पुलिस फरार मुख्य समन्वयक AK सहित अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।