नई दिल्ली, 03 सितंबर 2026
रोहित राजवीर सिंह डीसीपी सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ने बताया कि पशु क्रूरता और वन्यजीव अपराधों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई को मजबूत करने के उद्देश्य से मध्य जिला पुलिस ने PETA इंडिया के सहयोग से एक विशेष संवेदीकरण सत्र का आयोजन किया। यह सत्र दरियागंज स्थित डीसीपी कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित किया गया।
सत्र में अतिरिक्त डीसीपी-द्वितीय श्री प्रशांत चौधरी, जिले के एसीपी, विभिन्न थानों के 60 से अधिक पुलिसकर्मी और डीसीपी कार्यालय के स्टाफ ने हिस्सा लिया।
PETA इंडिया की ओर से लीगल एडवाइजर और डायरेक्टर ऑफ क्रुएल्टी रिस्पांस मीत अषर के नेतृत्व में 14 विशेषज्ञों की टीम ने पुलिसकर्मियों को कानूनी और व्यवहारिक जानकारी दी।
सत्र के दौरान पुलिसकर्मियों को वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960, दिल्ली कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम 1994, दिल्ली पशु क्रूरता निवारण नियम 1978 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के संबंधित प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताया गया।
विशेष जोर एफआईआर दर्ज करने, सही धाराओं के प्रयोग, जांच, साक्ष्य संरक्षण, जब्ती और कस्टडी प्रक्रिया पर दिया गया।
सत्र में बताया गया कि पशुओं के परिवहन के दौरान क्रूरता और जरूरी दस्तावेजों के नियम जरूरी है। भारवाही और बोझा ढोनेवाले पशुओं (Draught and Pack Animals Rules, 1965) से संबंधित प्रावधान से भी अवगतकरायागया। प्रदर्शन करने वाले पशुओं, पालतू पशुओं, स्ट्रीट डॉग्स और कम्युनिटी डॉग्स के प्रति क्रूरता अवैध बूचड़खानों, मीट शॉप्स और पशु वध से जुड़े नियम ।पशु तस्करी और अवैध व्यापार में क्रूरता की पहचान , बाघ, तेंदुआ, स्लॉथ भालू, एशियाई हाथी, भारतीय गैंडा, गाय और उसके वंशज जैसे संरक्षित पशुओं के वध पर प्रतिबंध। इन बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
अधिकारियों को बताया गया कि पशु अपराध के मामलों में समय पर कार्रवाई, सही दस्तावेजीकरण, साक्ष्यों की पहचान और संरक्षण कितना महत्वपूर्ण है। साथ ही वन्यजीवों के अवैध कब्जे वाले मामलों में पुलिस के अधिकारों और तत्काल संरक्षण हेतु कस्टडी लेने की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया।
सत्र के अंत में सभी प्रतिभागियों को एनिमल लॉ एनफोर्समेंट हैंडबुक और अन्य कानूनी संदर्भ सामग्री वितरित की गई, ताकि थाने स्तर पर प्रभावी कार्रवाई में मदद मिल सके।
वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों से पुलिसकर्मी पशु-संबंधी अपराधों को बेहतर ढंग से पहचान सकेंगे और कानून का संवेदनशील व पेशेवर तरीके से पालन सुनिश्चित कर सकेंगे।
मध्य जिला पुलिस ने पशु कल्याण से जुड़े कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों और पशु कल्याण संगठनों के साथ समन्वय जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।