नई दिल्ली, 29 जून: दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर पुलिस ने जामताड़ा, देवघर और दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने एपीके मैलवेयर और फर्जी बैंक अधिकारी बनकर ठगी करने वाले 10 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से 14 मोबाइल, एक लैपटॉप, डिजिटल सबूत और अपराध की कमाई से खरीदी गई महिंद्रा थार रॉक्स कार बरामद हुई है।
पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बताया कि यह गिरोह वरिष्ठ नागरिकों से लेकर आम लोगों तक को निशाना बनाता था। ठग खुद को बैंक या बीएसईएस अधिकारी बताकर व्हाट्सएप पर एपीके फाइल भेजते थे। फाइल इंस्टॉल करते ही मोबाइल हैक हो जाता और ठग ओटीपी व इंटरनेट बैंकिंग का एक्सेस लेकर खाते खाली कर देते थे।
चार बड़े मामले सुलझे:
- बुजुर्ग से 18.50 लाख की ठगी: जामताड़ा के मंजूर आलम समेत 6 आरोपियों ने सीनियर सिटीजन कार्ड बनवाने के नाम पर बुजुर्ग को फर्जी एपीके भेजी। बैंकिंग डिटेल हैक कर 18.50 लाख रुपये उड़ा दिए। पुलिस ने मेरठ और बुलंदशहर के 5 साथियों को भी पकड़ा।
- क्रेडिट कार्ड केवाईसी के नाम पर 1 लाख की चपत: देवघर के रवींद्र कुमार मंडल ने फर्जी कॉल कर केवाईसी के बहाने एपीके इंस्टॉल करवाई और 1,01,998 रुपये निकाल लिए। आरोपी को हजारीबाग से गिरफ्तार किया गया।
- फर्जी ‘M-Parivahan Challan’ से 1.09 लाख ठगे: देवघर के रामविजय कुमार दास ने चालान के नाम पर एपीके भेजकर मोबाइल हैक किया और 1,09,000 रुपये ट्रांसफर कर लिए।
- फर्जी बीएसईएस अधिकारी बनकर 6.31 लाख की ठगी: हजारीबाग के अंकित कुमार और गिरिडीह के गोलू कुमार ने बीएसईएस अधिकारी बनकर बैंक डिटेल हासिल की। गोलू ने अंकित के क्रेडिट कार्ड से 6.31 लाख रुपये की रकम इधर-उधर की।
इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक की टीम ने एसीपी संघमित्रा की निगरानी में तकनीकी जांच की। सामने आया कि जामताड़ा-देवघर बेल्ट से चल रहा यह गैंग मोबाइल, सिम, म्यूल बैंक खाते और यूपीआई आईडी आपस में शेयर करता था। ठगी के लिए रिमोट एक्सेस और फर्जी एपीके का इस्तेमाल होता था। पुलिस ने जामताड़ा, देवघर और हजारीबाग में छापेमारी कर गिरफ्तारी की। इसके पास से 14 मोबाइल, एक लैपटॉप, एक थार रॉक्स और डिजिटल सबूत मिले हैं। चारों मामलों में धारा 318(4)/319/340/61(2) बीएनएस के तहत केस दर्ज किया गया हैं। पुलिस अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।