नई दिल्ली, पहाड़गंज : दिल्ली नगर निगम का करोल बाग जोन एक बार फिर अपने दोहरे रवैये को लेकर सुर्खियों में है। जोन के बिल्डिंग विभाग पर गंभीर आरोप लग रहे हैं कि विभाग कानून का इस्तेमाल चुन-चुन कर कर रहा है।
मामला करोल बाग जोन के अंतर्गत आने वाले पहाड़गंज , मुल्तानी ढांडा इलाके का है। जहां भवन संख्या 8315, गली नंबर 4 में सभी नियमों को ताक पर रखकर 5 मंजिला इमारत को अवैध निर्माण कर खड़ा कर दिया गया ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले इलाके में एक मंदिर की बाउंड्री वॉल के निर्माण कार्य पर बिल्डिंग विभाग की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हथौड़े चलवा दिए। बताया जा रहा है कि बाउंड्री वॉल सुरक्षा की दृष्टि से बनाई जा रही थी, लेकिन विभाग ने बिना कोई नोटिस का पर्याप्त समय दिए उसे अवैध करार देकर तोड़ दिया।
वहीं इससे ठीक उलट तस्वीर मुल्तानी ढांडा, पहाड़गंज में देखने को मिल रही है। यहाँ एक बिल्डर द्वारा खुलेआम कई मंजिला अवैध इमारत का निर्माण किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह निर्माण बिना नक्शा पास कराए और बिल्डिंग बायलॉज को ताक पर रखकर किया जा रहा है। जो जानकारी मिली उसके अनुसार इस अवैध निर्माण कुछ पुलिसकर्मियों का भी पैसा लगा है। यही वजह है कि इस अवैध निर्माण को पूर्ण संरक्षण दिया जा रहा है? फिलहाल ये जांच का विषय है।
स्थानीय लोगों में भारी रोष
स्थानीय निवासियों का कहना है कि MCD के जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर रोजाना इसी सड़क से गुजरते हैं, लेकिन बिल्डर के अवैध निर्माण पर उनकी आंखें बंद हैं। कई बार 311 पर शिकायत करने के बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि निर्माण की गति और तेज हो गई है।
एक स्थानीय दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “मंदिर की दो ईंट की दीवार विभाग को तुरंत दिख जाती है, लेकिन बगल में बिना पिलर के खड़ी हो रही 5 मंजिला बिल्डिंग किसी को नहीं दिख रही। इससे साफ पता चलता है कि ऊपर से नीचे तक सब मैनेज है।”
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
इस पूरे मामले ने MCD की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर एक ही जोन में दो तरह के नियम कैसे लागू हो सकते हैं? क्या बिल्डर माफिया और बिल्डिंग विभाग के अधिकारियों के बीच कोई सांठगांठ है? क्या हर मंजिल के हिसाब से लेन-देन तय है?
करोल बाग जोन पहले भी इसी तरह के मामलों को लेकर विवादों में रहा है। कई बार विजिलेंस जांच की बात भी उठी, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद MCD कमिश्नर और अतिरिक्त कमिश्नर (इंजीनियरिंग) इस मामले का संज्ञान लेते हैं या नहीं। क्या मुल्तानी ढांडा के अवैध निर्माण पर भी उसी तरह हथौड़ा चलेगा जैसे मंदिर की बाउंड्री वॉल पर चला था, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
क्षेत्र के लोगों ने उप-राज्यपाल दिल्ली और MCD कमिश्नर से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।