नई दिल्ली: राजधानी में हाल के प्रदर्शनों के बीच लग रहे आरोपों पर दिल्ली पुलिस ने तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस का कहना है कि दावों और हकीकत में अंतर होने पर सिर्फ तथ्यों को सामने रखना जरूरी है।
दिल्ली पुलिस की DCP शृष्टि पांडे ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच “किसी गलत प्रभाव” के कारण युवा पीढ़ी भटक रही है, और उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपने कृत्यों के दीर्घकालिक और कानूनी परिणामों पर विचार करने का आग्रह किया है।
महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा हैंडल किए जाने के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए DCP ने कहा, “हमारी फोर्स बेहद प्रोफेशनल है। हम जानते हैं कि अलग-अलग जेंडर के लोगों से कैसे निपटना है।”
पुलिस पर लग रहे आरोपों को लेकर DCP ने दो टूक कहा कि “जो आरोप प्रसारित किए जा रहे हैं… वे जानबूझकर लगाए गए हैं और दिल्ली पुलिस को बदनाम करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।”
DCP PRO कार्यालय की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो और दावों की जांच में वे भ्रामक पाए गए हैं। हाल ही में एक मामले में पुलिस ने बताया कि जंतर-मंतर पर विरोध के दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा महिला से दुर्व्यवहार का जो CCTV फुटेज प्रसारित किया जा रहा था, वह फर्जी और AI-जनरेटेड था।
पुलिस ने अपील की है कि किसी भी दावे को सच मानने से पहले उसके तथ्य की जांच की जाए और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान करते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया जाए।