थाना साइबर दक्षिण-पश्चिम जिला ने “फर्जी गैस कनेक्शन/डिस्कनेक्शन” घोटाले में शामिल संगठित साइबर ठगी सिंडिकेट का किया भंडाफोड़, 4 आरोपी गिरफ्तार।

20 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 1 टैबलेट, डिजिटल उपकरण, सोने/चांदी के आभूषण, नकदी और एक टाटा हैरियर वाहन बरामद।

साइबर पुलिस थाना, दक्षिण-पश्चिम जिला, नई दिल्ली ने नागरिकों को फर्जी संदेशों के जरिए गैस कनेक्शन काटने का डर दिखाकर ठगने वाले एक संगठित सिंडिकेट का सफलतापूर्वक पर्दाफाश किया है। आरोपी पीड़ितों के डिवाइस में दुर्भावनापूर्ण APK फाइल के जरिए अनधिकृत पहुंच प्राप्त करते थे और ठगी की रकम को महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामानों में बदल देते थे। इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है तथा 20 मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरण, सोने/चांदी के आभूषण, नकदी और एक वाहन बरामद किया गया है।


अमित गोयल डीसीपी, दक्षिण-पश्चिम जिला की मुताबिक यह मामला ई-एफआईआर संख्या 53/25, धारा 318(4)/319(2)/61(2)/3(5) बीएनएस, थाना साइबर दक्षिण-पश्चिम जिला के तहत दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे एक मोबाइल नंबर से संदेश मिला कि उसका आईजीएल गैस कनेक्शन काटा जा रहा है। सहायता के लिए दूसरे नंबर पर संपर्क करने को कहा गया। जब शिकायतकर्ता ने उस नंबर पर संपर्क किया, तो ठगों ने एक APK फाइल भेजी। दुर्भावनापूर्ण APK एप्लिकेशन इंस्टॉल करते ही आरोपियों ने उसके डिवाइस तक अनधिकृत पहुंच प्राप्त कर ली और उसके बैंक खाते व क्रेडिट कार्ड से धोखाधड़ी कर लेनदेन किए। लगभग ₹2.64 लाख की ठगी की गई। ठगों ने तुरंत ठगी की रकम को महंगे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, गिफ्ट कार्ड्स और अन्य सामान खरीदने में इस्तेमाल कर अपराध की आय को छिपाने और लेयरिंग करने का प्रयास किया।


अपराध की गंभीरता को देखते हुए इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक एसएचओ/साइबर दक्षिण-पश्चिम के नेतृत्व और श्रीमती संघमित्रा एसीपी/ऑप्स दक्षिण-पश्चिम जिला के समग्र पर्यवेक्षण में जांच अधिकारी एसआई जगदीप नारा, एचसी विकास, एचसी विनोद कुमार, एचसी हरेंदर, एचसी प्रवीण और महिला एचसी रीना की टीम गठित की गई। जांच में पता चला कि पीड़िता के क्रेडिट कार्ड से दो मोबाइल फोन खरीदे गए थे। दोनों डिवाइस, डिलीवरी पते और संबंधित विवरण की जांच की गई। डिलीवरी विवरण से पता चला कि डिवाइस शाहीन बाग, दिल्ली के एक फर्जी पते पर डिलीवर हुए थे। डिलीवरी प्रक्रिया में दर्ज मोबाइल नंबर कोलकाता और झारखंड से संचालित व्यापक नेटवर्क से जुड़े पाए गए। गहन तकनीकी विश्लेषण से कई व्यक्तियों के समन्वित रूप से शामिल होने की पुष्टि हुई।

आगे की जांच में एक संदिग्ध मोबाइल नंबर उसी स्थान पर सक्रिय पाया गया जहां धोखाधड़ी वाली डिलीवरी हुई थी। उस नंबर के उपयोगकर्ता को शाहीन बाग, दिल्ली की एक दुकान से पकड़ा गया जहां वह सेल्सपर्सन का काम करता था। उसके मोबाइल फोन की जांच में कोलकाता स्थित साइबर अपराधियों से बातचीत सामने आई। उसने बताया कि वह साइबर अपराधियों की ओर से पार्सल प्राप्त करता था और कमीशन के बदले उनके निर्देशानुसार सामान कोलकाता भेजता था। उसने ऑनलाइन डिलीवरी के जरिए सोने के सिक्के प्राप्त करने की बात भी कबूली, जिन्हें जांच के दौरान जब्त किया गया।


आगे की जांच में खिद्दरपुर हब, कोलकाता में एक पार्सल ट्रेस किया गया। पार्सल प्राप्त करते समय आरोपी मोहम्मद साहिल निवासी ब्रेस ब्रिज, कोलकाता, पश्चिम बंगाल को पकड़ा गया। जांच में पता चला कि वह फर्जी पहचान के नाम पर पार्सल प्राप्त कर रहा था और कई डिलीवरी ले चुका था। पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच में मोहम्मद साहिल ने सिंडिकेट के अन्य सदस्यों से अपने संबंध बताए। तकनीकी विश्लेषण और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मोहम्मद रहीम निवासी खिद्दरपुर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल की भूमिका सामने आई। वह साइबर ठगी से प्राप्त नए मोबाइल फोन प्राप्त करने में शामिल पाया गया। जांच में पता चला कि वह ऐसे उपकरण भारी छूट पर खरीदता था और ट्रेसेबिलिटी से बचने के लिए विदेशी हैंडलर्स सहित अवैध चैनलों के माध्यम से उन्हें आगे बेच देता था।


आगे की जांच में मोहम्मद मोहसिन निवासी देवघर, झारखंड और मोहम्मद दिलशाद निवासी देवघर, झारखंड की संलिप्तता सामने आई। तकनीकी जांच से स्थापित हुआ कि वे खरीदे गए उपकरणों के निपटान की व्यवस्था कर रहे थे और साइबर ठगी से प्राप्त आय को संभाल रहे थे। आरोपी संचार और समन्वय के लिए कई मोबाइल नंबर और उपकरणों का उपयोग कर रहे थे।

जांच में पता चला कि ठगी की रकम का उपयोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मोबाइल फोन खरीदने, गिफ्ट कार्ड खरीदने, ऑनलाइन शॉपिंग लेनदेन और मध्यस्थ खातों/कार्ड्स के जरिए ट्रांसफर करने में किया गया। आरोपियों ने पैसे को चल संपत्ति और इलेक्ट्रॉनिक सामान में बदलकर अपराध की आय को छिपाने का प्रयास किया। फिलहाल आगे की जांच जारी है।

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