दिल्ली सरकार ध्यान दे: टूरिज्म डिपार्टमेंट में भ्रष्टाचार का खुला खेल, मालवीय नगर अग्निकांड-23 लोगो की मौत के बाद भी प्रशासन आँखे मूंदे बैठा है ???

विशेष संवाददाता मणि आर्य

नई दिल्ली, 1 जुलाई 2026:
राजधानी दिल्ली के टूरिज्म डिपार्टमेंट में फैले व्यापक भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा नमूना अब सामने आ रहा है। मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद भी दिल्ली प्रशासन और टूरिज्म विभाग ने आंखें मूंद रखी हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक नियमों की धज्जियां उड़ती रहेंगी और कब तक जान-माल से खिलवाड़ होता रहेगा? दिल्ली सरकार की ओर से बयान आया था कि बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम को वापस लिया जाता है। अगर ऐसा है तो दिल्ली में किस आधार पर बेड एंड ब्रेकफास्ट इकाइयां अभी भी चल रही है। कैसे खुले हैं अभी भी बेड एंड ब्रेकफास्ट यूनिट (होटल्स) की तर्ज़ पर ? इन पर अभी तक कोई कानूनी कार्यवाही क्यों नहीं ? जब हमारे संवाददाता ने दिल्ली सरकार टूरिज्म डिपार्टमेंट के आला अधिकारियों से बात की तो वो केवल फाइल्स इधर से उधर होने की बात कहते नजर आए। कभी कहते है कि एसडीएम साहब कानूनी कार्यवाही करेंगे तो कभी कहते हैं कि पुलिस कानूनी कार्यवाही करेगी? कुलमिलाकर टालमटोल? आखिर कौन करेगा कानूनी कार्यवाही, कौन लेगा जिम्मेदारी ? क्या दिल्ली सरकार ने अब तक किसी भी प्रशासनिक अधिकारी पर कोई कानूनी कार्यवाही की है खासकर टूरिज्म डिपार्टमेंट के अधिकारियों पर:-शायद नहीं।

ज्ञात हो मालवीय नगर अग्निकांड में 23 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। लेकिन दिल्ली सरकार प्रशासन और पुलिस को इससे क्या। दर्द उसी को होता है जिसका अपना कोई इस दुनिया को छोड़कर चला जाता है। बस चंद दिन सरकार, नेता और प्रशासन घड़ियाली आंसू बहाकर कुछ बयानबाजी कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं और फिर शांत हो जाते हैं और फिर सिस्टम फिर वैसे ही चलने लगता है। फिर वही भ्रष्टाचार का खेल और अवैध वसूली ? फिर चाहे फिर से कोई अग्निकांड हो जाए, चाहे किसी की जान चली जाए सरकारी तंत्र को कोई फर्क नहीं पड़ता ? बस जेब गर्म होनी चाहिए नहीं तो ऐसी क्या वजह है अवैध रूप से बने बेड एंड ब्रेकफास्ट यूनिट, होटल्स और स्पा पर कोई कानूनी कार्यवाही नहीं होती ?

पहाड़गंज में ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ की आड़ में जिस्मफरोशी का धंधा
सबसे गंभीर आरोप पहाड़गंज इलाके से आ रहे हैं। यहां ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम’ के नाम पर अवैध धंधों का जाल फैला हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई यूनिट्स में पर्यटन के नाम पर जिस्मफरोशी का धंधा खुलेआम चल रहा है।

नियमों को ताक पर रखकर चल रहे B&B यूनिट्स

  1. भवन नियमों का उल्लंघन: अधिकतर भवन अवैध तरीके से बने हैं। न फायर NOC है, न बिल्डिंग प्लान पास है। 2. लीज पर होटल की तरह संचालन: भवन मालिकों ने अपने मकान 3 से 4 लाख रुपये महीने की भारी-भरकम लीज पर दे रखे हैं। इन्हें पूरी तरह होटल की तर्ज पर चलाया जा रहा है। 3. स्कीम का खुला उल्लंघन: ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम’ के तहत शर्त है कि भू-स्वामी को अपने परिवार के साथ उसी परिसर में रहना अनिवार्य है। लेकिन हकीकत यह है कि कोई भी मालिक इन यूनिट्स में नहीं रहता। पूरा भवन कमर्शियल होटल बना दिया गया है। 4. टूरिज्म डिपार्टमेंट की भूमिका संदिग्ध: आरोप है कि टूरिज्म डिपार्टमेंट के अधिकारी मोटी वसूली कर इन अवैध यूनिट्स को संरक्षण दे रहे हैं। शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती।
    मालवीय नगर अग्निकांड से भी नहीं जागा प्रशासन
    कुछ दिन पहले मालवीय नगर में एक अवैध कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगने से बड़ा हादसा हुआ था। उस बिल्डिंग में भी फायर सेफ्टी के कोई इंतजाम नहीं थे। इस घटना के बाद उम्मीद थी कि दिल्ली सरकार और टूरिज्म डिपार्टमेंट अवैध B&B यूनिट्स पर सख्त कार्रवाई करेगा, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस है।

स्थानीय लोगों में आक्रोश
पहाड़गंज रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है, “हम कई साल से शिकायत कर रहे हैं। फाइलें दबा दी जाती हैं। टूरिज्म विभाग को हर महीने पैसा पहुंच जाता है, इसलिए कोई छापा नहीं पड़ता। अगर सरकार में हिम्मत है तो मानक तय कर इन सभी फर्जी B&B यूनिट्स को बंद करके दिखाए।”

क्या है ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम’
दिल्ली सरकार ने पर्यटकों को घर जैसा माहौल देने के लिए यह स्कीम शुरू की थी। इसके तहत घर के मालिक अपने घर में 1 से 6 कमरे तक पर्यटकों को दे सकते हैं। शर्त थी कि मालिक परिवार सहित वहीं रहेगा, कमर्शियल होटल जैसी सुविधाएं नहीं होंगी और सभी सुरक्षा मानकों का पालन होगा।

बड़े सवाल जो जवाब मांगते हैं

  1. मालवीय नगर जैसे हादसे के बाद भी फायर और बिल्डिंग सेफ्टी ऑडिट क्यों नहीं कराया गया? 2. टूरिज्म डिपार्टमेंट ने कितनी B&B यूनिट्स का फिजिकल वेरिफिकेशन किया है? 3. बिना भू-स्वामी के रह रहे यूनिट्स के लाइसेंस अब तक रद्द क्यों नहीं हुए? 4. 3-4 लाख की लीज पर चल रहे यूनिट्स पर इनकम टैक्स और GST की जांच क्यों नहीं होती?
    फिलहाल दिल्ली सरकार और टूरिज्म मंत्री की तरफ से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन जिस तरह से नियमों को ठेंगा दिखाकर अवैध कारोबार फल-फूल रहा है, उससे साफ है कि विभाग में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं। अब देखना होगा कि सरकार सिर्फ बयानबाजी करती है या जमीन पर कोई सख्त एक्शन लेती है।

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