रोहिणी जिले में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का फर्जीवाड़ा करने वाला गैंग गिरफ्तार, 1 लाख से ज्यादा रकम फ्रीज

रोहिणी जिले की साइबर पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक हाईटेक गैंग का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने तीन आरोपियों अंकित, सैफ अंसारी और मोहम्मद नूर आलम को गिरफ्तार कर उनके पास से तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं और खाते में 1,03,142 रुपये फ्रीज कर दिए हैं।

शशांक जयसवाल IPS, डीसीपी रोहिणी ने बताया कि शिकायतकर्ता ने 19.01.2026 को NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। 08.01.2026 को उसे एक महिला का कॉल आया जिसने खुद को टेलीकॉम कंपनी का कर्मचारी बताया। महिला ने कहा कि उसके आधार कार्ड से बेंगलुरु में अवैध गेमिंग के लिए एक मोबाइल नंबर जारी हुआ है। इसके बाद उसे वीडियो कॉल पर इंदिरा नगर थाने के फर्जी SI से जोड़ दिया गया।

ठगों ने डराया कि शिकायतकर्ता के आधार से चार बैंक खाते खोले गए हैं जो हितेश मेहता नाम के मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़े हैं। लगातार वीडियो निगरानी में रखकर आरोपियों ने उससे बैंक खाते, FD, म्यूचुअल फंड और शेयर की जानकारी निकलवाई।

फर्जी RBI रसीदें दिखाकर ठगों ने 09.01.2026 से 16.01.2026 के बीच ₹15,31,997 अलग-अलग खातों और UPI ID पर ट्रांसफर करवा लिए। पैसे यह कहकर मंगवाए गए कि जांच के लिए RBI ऑडिटर के एस्क्रो अकाउंट में जमा कराने हैं और बाद में वापस मिल जाएंगे।
जांच और गिरफ्तारी
SHO साइबर प्रवीण चौहान की टीम ने ACP/OPS अजमेर सिंह की निगरानी में जांच शुरू की। E-FIR No. 60000386/26 दर्ज कर SI अजीत सिंह, HC मनोज, HC नवीन और W/HC मीनू की टीम बनाई गई।

जांच में दो मुख्य खाते सामने आए:

  1. अंकित के यूनियन बैंक खाते में ₹1,98,000 आए 2. अमन कुमार के बैंक ऑफ इंडिया खाते में ₹98,000 आए
    दोनों खातों से जुड़े मोबाइल नंबर एक ही डिवाइस से चल रहे थे और लोकेशन इस्माइलपुर, फरीदाबाद निकली।

पुलिस ने कन्नौज, यूपी के गांव दीपारी से अंकित को पकड़ा। उसने बताया कि वह मो. नूर आलम के लिए काम करता था जो साइबर फ्रॉड के लिए म्यूल अकाउंट सप्लाई करता है। अंकित ने चार बैंक खाते, सिम, आधार कॉपी और कंसेंट नोट दिए थे।

दूसरा आरोपी सैम अंसारी कानपुर से गिरफ्तार हुआ। उसने भी अपना बैंक खाता फ्रॉड के लिए दिया था और सोशल मीडिया से हैंडलर के संपर्क में था।

मास्टरमाइंड मो. नूर आलम को इस्माइलपुर, फरीदाबाद से पकड़ा गया। वह पाकिस्तान में बैठे बिलाल के संपर्क में था। ठगी का पैसा पहले नूर आलम के अरेंज किए खातों में जाता था, फिर उसे USDT क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर बिलाल को भेज दिया जाता था। नूर आलम को कमीशन भी USDT में मिलता था। आरोपियों का संपर्क इंस्टाग्राम से हुआ था।

साइबर ठगी से बचने के लिए ध्यान रखें: कोई भी पुलिस अधिकारी या सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर जांच नहीं करती। CBI, RBI या पुलिस कभी पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती। ऐसे कॉल आएं तो तुरंत 1930 पर शिकायत करें।

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