नई दिल्ली | पहाड़गंज: मध्य दिल्ली का घनी आबादी वाला पहाड़गंज इलाका एक बार फिर अवैध निर्माण को लेकर चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में कुछ बिल्डर स्थानीय नेताओं के संरक्षण में बिना नक्शा पास कराए और तय FAR से ज्यादा अवैध निर्माण कर रहे हैं। कई जगहों पर बेसमेंट से लेकर 4-5 मंजिल तक अतिरिक्त निर्माण और पुरानी इमारतों को होटल-गेस्ट हाउस में तब्दील करने का काम खुलेआम चल रहा है, लेकिन निगम की ओर से कोई रोक नहीं लग रही।
वही बात करे स्लैम के कटरो कि तो उन्हीं कटरो में रहने वाले किरायेदारों/कब्जेदारों से बिल्डर औने पौने में उन कटरो को अवैध रूप से खरीद कर सभी नियमों को ताक पर रखकर बहु मंजिला इमारत खड़ी कर रहे और जानबूझकर अंजान बन DDA के अधिकारी भी आंखे मूंदे बैठे है।
पहाड़गंज क्षेत्र दिल्ली नगर निगम (MCD) के करोल बाग जोन के अंतर्गत आता है। इसी जोन में हाल ही में MCD ने खुद बड़ी कार्रवाई की है। निगम के निरंतर प्रवर्तन अभियान के तहत करोल बाग जोन के विभिन्न क्षेत्रों में 11 संपत्तियों को सील और अवैध निर्माण को ध्वस्त किया गया था। इससे पहले भी देशबंधु गुप्ता रोड से रानी झांसी रोड तक बुलडोजर एक्शन कर अतिक्रमण हटाया गया था।
ऐसे में सवाल उठता है कि अगर MCD कार्रवाई कर सकती है, तो पहाड़गंज में लगातार हो रहे कथित अवैध निर्माण पर आंख क्यों मूंदी जा रही है? खासकर 4196/1 , गली भगवती भवन तेल मंडी पहाड़ गंज, 2777 गली नंबर 6 से लेकर 2837 गली नंबर 5,( आर पार) चूना मंडी पहाड़ गंज, 1041, मैन बाजार पहाड़ गंज, 2847 गली नंबर 5, चूना मंडी पहाड़ गंज, गली नंबर 6, आरा काशा रोड पहाड़ गंज नई दिल्ली आदि ऐसे उदाहरण है जिन अवैध निर्माणों पर बिल्डिंग डिपार्टमेंट करोल बाग जोन पूर्ण संरक्षण दे रहा है। इन अवैध निर्माणों पर बिल्डिंग डिपार्टमेंट करोल बाग जोन ने अब तक डीएमसी एक्ट के तहत कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की है।
MCD करोल बाग जोन बिल्डिंग डिपार्टमेंट की क्या है जिम्मेदारी?
MCD का बिल्डिंग विभाग किसी भी निर्माण का असली पहरेदार होता है। दिल्ली नगर निगम अधिनियम और Unified Building Bye Laws 2016 के तहत उसकी जिम्मेदारी तय है:
- नक्शा पास करना और जांचना: बिना स्वीकृत बिल्डिंग प्लान के कोई भी निर्माण अवैध है। विभाग की जिम्मेदारी है कि वह साइट का निरीक्षण करे।
- नियमित निगरानी: हर वार्ड में तैनात जूनियर इंजीनियर (JE) और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) को अपने क्षेत्र में चल रहे निर्माणों की रोजाना मॉनिटरिंग करनी होती है।
- अवैध निर्माण को बुक करना: जैसे ही अतिरिक्त फ्लोर, बेसमेंट या बिना सेटबैक के निर्माण दिखे, उसे तुरंत ‘बुक’ कर नोटिस जारी करना, काम रुकवाना और फाइल को डेमोलिशन सेल में भेजना।
- ध्वस्तीकरण और सीलिंग: नोटिस के बाद भी काम न रुके तो ध्वस्तीकरण (Demolition) और संपत्ति को सील करने की कार्रवाई करना।
- जवाबदेही तय करना: दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही कह चुका है कि अगर अतिक्रमण नहीं हटा तो संबंधित MCD इंजीनियर और SHO जिम्मेदार होंगे।
नियमों के मुताबिक अगर किसी क्षेत्र में लगातार अवैध निर्माण हो रहा है, तो यह सीधे तौर पर स्थानीय JE/AE और Executive Engineer (Building) की लापरवाही या मिलीभगत माना जाता है।
संरक्षण का आरोप क्यों गंभीर है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिल्डर खुलेआम कहते हैं कि “ऊपर तक बात हो गई है”। आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण के कारण फील्ड स्टाफ शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करता, या महज खानापूर्ति के लिए नोटिस देकर फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है।
जबकि सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने खुद करोल बाग, चांदनी चौक समेत 10 इलाकों में खतरनाक और अनधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई तेज करने का ऐलान किया था।
लोगों की मांग
पहाड़गंज के निवासियों ने मांग की है कि:
- पिछले 1 साल में पहाड़गंज वार्ड में कितने अवैध निर्माण बुक हुए और कितनों पर तोड़फोड़ हुई, इसकी सूची सार्वजनिक की जाए।
- जिन इमारतों में तय मापदंड से ज्यादा निर्माण हुआ है, उनका स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाए।
- लापरवाह अधिकारियों पर DMC एक्ट के तहत विभागीय कार्रवाई हो।
अवैध निर्माण सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि लोगों की जान से खिलवाड़ है। देखना होगा कि MCD करोल बाग जोन बिल्डिंग विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इन निर्माणों पर कब कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी नोटिस तक ही सीमित रह जाएगा।