क्या बच्चों को भी तपेदिक (टीबी) हो सकती है?
जानिए जरूरी सवाल जवाब
प्रश्न 1. क्या बच्चों को भी टीबी हो सकती है?
उत्तर: हाँ। टीबी किसी भी आयु के बच्चे को हो सकती है। विशेषकर पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में जोखिम अधिक होता है यदि वे किसी संक्रामक फेफड़ों की टीबी के रोगी के निकट संपर्क में रहते हैं। समय पर पहचान और उपचार से अधिकांश बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं।
प्रश्न 2. किन बच्चों में टीबी होने का खतरा अधिक होता है?
उत्तर:
जिनके घर में टीबी का रोगी हो।
पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चे।
कुपोषित बच्चे।
कमजोर प्रतिरक्षा वाले बच्चे।
भीड़भाड़ एवं खराब वेंटिलेशन वाले वातावरण में रहने वाले बच्चे।
प्रश्न 3. बच्चों में टीबी के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
उत्तर:
दो सप्ताह से अधिक बुखार।
लगातार खाँसी।
वजन न बढ़ना या वजन कम होना।
भूख कम लगना।
खेलने-कूदने में कमी या सुस्ती।
गर्दन की गाँठों में सूजन। यदि ये लक्षण बने रहें तो चिकित्सक से तुरंत परामर्श लें।
प्रश्न 4. बच्चों में टीबी की पहचान कैसे की जाती है?
उत्तर: चिकित्सकीय परीक्षण, टीबी रोगी के संपर्क का इतिहास, चेस्ट एक्स-रे, आवश्यकता अनुसार CBNAAT/Truenat जैसी आणविक जाँच तथा अन्य आवश्यक जाँचों के आधार पर निदान किया जाता है। बच्चों में टीबी का निदान वयस्कों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
प्रश्न 5. क्या बच्चों में टीबी की रोकथाम संभव है?
उत्तर: हाँ। रोकथाम के लिए:
जन्म के समय BCG टीकाकरण।
परिवार के टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान एवं उपचार।
घर के सभी संपर्कों की टीबी जाँच।
पात्र बच्चों को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) देना।
अच्छा पोषण तथा धूम्रपान-मुक्त घर।
प्रश्न 6. क्या बच्चों की टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है?
उत्तर: बिल्कुल। यदि समय पर निदान हो, पूरा उपचार लिया जाए और परिवार का सहयोग मिले, तो अधिकांश बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं।
प्रश्न 7. अभिभावकों के लिए आपका संदेश क्या है?
उत्तर: यदि परिवार में किसी सदस्य को टीबी है, तो घर के प्रत्येक बच्चे की टीबी के लिए जाँच अवश्य कराएँ।
**निष्कर्ष*
डॉ. एस. के. अरोड़ा के अनुसार विश्व में हर वर्ष लगभग 12 लाख बच्चों को टीबी होती है।
कुल टीबी रोगियों में लगभग 11% बच्चे होते हैं। भारत में वर्ष 2023 में 1,43,174 बाल टीबी रोगियों की सूचना NTEP के अंतर्गत दर्ज की गई। टीबी रोगी के संपर्क में रहने वाले प्रत्येक बच्चे की टीबी जाँच आवश्यक है। पात्र बच्चों को लक्षण न होने पर भी टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) दिया जाना चाहिए। समय पर उठाया गया कदम बच्चे का भविष्य सुरक्षित कर सकता है।
तंबाकू छोड़ें। → टीबी समाप्त करें। → जीवन बचाएँ।
डॉ. एस.के. अरोड़ा
सीनियर चेस्ट विशेषज्ञ,कंसल्टेंट,
पूर्व दिल्ली स्टेट टीबी हेड, दिल्ली सरकार (डब्ल्यूएचओ द्वारा सम्मानित)
TB Expert | Tobacco Control Advocate | Public Health (India)