नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम चुनावों को लेकर भाजपा ने अंदरखाने बड़ा फैसला कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक इस बार पार्टी किसी भी सिटिंग पार्षद को टिकट नहीं देने जा रही है।
भाजपा के इस फैसले के पीछे दिल्ली भाजपा में चल रहे चापलूसी के दौर को खत्म करने का दिखावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है।
दरअसल भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को भी अब यह बात अच्छी तरह पता चल गई है कि उसके सभी पार्षद निगम में रहते हुए कोई काम नहीं कर रहे हैं। वार्डों में विकास ठप है और सिर्फ भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
अब पार्टी की रणनीति है कि पुराने चेहरों को छुपाकर नए चेहरे सामने ले आए जाएं और जनता को यह बताया जाए कि हमने भ्रष्टाचार के कारण ही उनके टिकट काटे हैं।
लेकिन सच्चाई यह है कि भाजपा में यह खेल चलता रहेगा। जो नए चेहरे आगे आएंगे, वे भी उसी भ्रष्टाचार की राह पर चलेंगे। जनता अब सब जान चुकी है। जमीनी स्तर पर लोगों में भारी नाराजगी है और इस बार जनता भाजपा को वोट देने के मूड में बिल्कुल नहीं है।