सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जब भी अवमानना का नोटिस जारी किया जाता है, तो नोटिस का जवाब देने वाले पक्ष के लिए यह अनिवार्य होता है कि वह अपने हलफनामे की शुरुआत बिना शर्त माफी से करे। इसके बाद ही अन्य सभी तथ्य और दलीलें प्रस्तुत की जाती हैं। हर अवमानना याचिका में इस प्रक्रिया का अनिवार्य रूप से पालन किया जाता है।
इसी स्थापित परंपरा का पालन करते हुए गृह सचिव, पुलिस आयुक्त और अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा दायर किए गए हलफनामों के पहले पैराग्राफ में इस अनिवार्यता का अनुपालन किया गया है।
बयान में आगे कहा गया है कि इसके बाद हलफनामे में विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है, जिसके माध्यम से यह स्पष्ट रूप से स्थापित किया गया है कि सरकार और पुलिस द्वारा की गई सभी कार्रवाइयां पूरी तरह से कानून के अनुरूप हैं और उनके खिलाफ अवमानना का कोई मामला नहीं बनता है।