पहाड़गंज में ‘प्रतिबंधित’ बोरिंग पर सियासी ड्रिल: विधायक-सांसद फंड आमने-सामने

दिल्ली ब्यूरो | 8 जुलाई 2026

पहाड़गंज की तंग गलियों में इन दिनों पानी को लेकर सियासत गर्म है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में विधायक निधि और सांसद निधि, दोनों से ही पानी की बोरिंग कराई जा रही है। सवाल यह है कि जब केंद्र सरकार ने दिल्ली के डार्क जोन में नई बोरिंग पर रोक लगा रखी है, तो फिर जनप्रतिनिधियों के फंड से ये काम कैसे हो रहा है?

एक जगह, दो बोर्ड, दो दावे
चूना मंडी मुल्तानी ढांडा, मंटोला , चांदी वाली गली,पहाड़ गंज के विभिन्न हिस्सों में एक ही स्थान पर दो बोर्ड लगे हैं। एक पर लिखा है: ‘विधायक निधि से बोरिंग कार्य’ और दूसरे पर ‘सांसद निधि से जल आपूर्ति हेतु बोरिंग’. स्थानीय दुकानदार कहते हैं, “कुछ फासले पर दो बोरिंग की क्या जरूरत थी? पैसा तो जनता का ही लग रहा है।”

प्रतिबंध के बाद भी बोरिंग कैसे?
केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने 2020 में ही दिल्ली के 11 जिलों को ‘ओवर-एक्सप्लॉइटेड’ घोषित कर नई बोरिंग पर रोक लगा दी थी। पहाड़गंज भी इसी दायरे में आता है। बिना CGWA की NOC के बोरिंग गैरकानूनी है। ऐसे में सवाल उठता है कि जनप्रतिनिधियों को अनुमति किसने दी? दिल्ली जल बोर्ड के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “फाइलों में इसे ‘रिबोर’ या ‘मरम्मत’ दिखाकर काम कराया जाता है।”

पानी पीने लायक है भी या नहीं?
सबसे बड़ा सवाल गुणवत्ता का है। पहाड़गंज का भूजल स्तर पहले ही 200 से 300 मीटर से नीचे जा चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक यहां का पानी TDS और नाइट्रेट की मात्रा तय मानकों से कहीं ज्यादा है। एम्स के पूर्व जल विशेषज्ञ डॉ. एस.के. शर्मा कहते हैं, “बिना RO-फिल्टर के यह पानी सीधे पीना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।”

जनहित या होटल हित?
पहाड़गंज में 1500 से ज्यादा बजट होटल और गेस्ट हाउस हैं। स्थानीय निवासी कविता देवी का आरोप है, “गर्मियों में हमारे घरों में 2 घंटे पानी आता है, पर होटलों की टंकियां 24 घंटे भरी रहती हैं। ये बोरिंग किसके लिए हो रही है?” होटल एसोसिएशन का कहना है कि वे टैंकर पर निर्भर हैं और बोरिंग से उनका लेना-देना नहीं है।

सही क्या, गलत क्या?

  1. नियम: CGWA की अनुमति बिना बोरिंग अवैध है।
  2. . पारदर्शिता: एक ही जगह दो फंड से काम क्यों? क्या DPR में इसकी जरूरत बताई गई?
  3. . जवाबदेही: पानी की गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं?
    फिलहाल विधायक और सांसद कार्यालय से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। SDM करोल बाग ने कहा है कि “शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी।”

आगे क्या?
पहाड़गंज RWA ने उपराज्यपाल से पूरे मामले की जांच मांग की है। सवाल सिर्फ बोरिंग का नहीं, बल्कि यह है कि ‘डार्क जोन’ में गिरते भूजल के बीच जनप्रतिनिधि निधि का इस्तेमाल ‘जनहित’ में हो रहा है या ‘कुछ खास’ को फायदा पहुंचाने के लिए?

नोट: यह खबर स्थानीय लोगों के आरोपों और मौजूदा सरकारी नियमों पर आधारित है। अखबार सभी पक्षों का संस्करण छापने को तैयार है।

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