मध्य जिले पुलिस की बड़ी कामयाबी: अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, 10 और आरोपी गिरफ्तार, 4 मासूम और बरामद

नई दिल्ली: मध्य जिला पुलिस ने अंतरराज्यीय बाल तस्करी के एक बड़े संगठित रैकेट का पर्दाफाश करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने इस मामले में जैविक माता-पिता समेत 10 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है और अलग-अलग राज्यों से 4 और बच्चों को सुरक्षित बचाया है। अब तक इस केस में कुल 09 बच्चे बचाए जा चुके हैं।

पुलिस ने कई लाख रुपये के अवैध लेन-देन का मनी ट्रेल भी उजागर किया है।
05.जून 2026 को एंटी नारकोटिक्स सेल, मध्य जिला को गुप्त सूचना मिली थी। सूचना पर कार्रवाई करते हुए टीम ने पहाड़गंज इलाके में आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास जाल बिछाया। पुलिस द्वारा तैयार किए गए नकली ग्राहकों को एक नवजात शिशु को बेचने की कोशिश कर रहे तीन आरोपियों – ज्योति उर्फ कमलेश, शालू और ललित को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।

मौके से 4-5 दिन का एक नवजात बालक सुरक्षित बचाया गया और सौदे के लिए दी गई 20,000 रुपये की टोकन मनी भी बरामद की गई। इस संबंध में थाना पहाड़गंज में FIR No. 258/2026 धारा 143(4)/61(2)/3(5) BNS और 81 JJ Act के तहत मामला दर्ज कर जांच W/SI प्रगति को सौंपी गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल DCP-II प्रशांत चौधरी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। टीम में ACP पटेल नगर, ACP OPS, SHO पहाड़गंज, इंचार्ज स्पेशल स्टाफ, इंचार्ज पीपी संगतराशन, W/SI प्रगति, W/SI प्रगति सैनी सहित अन्य स्टाफ शामिल थे। कानूनी पेचीदगियों के लिए विधि सलाहकार की भी मदद ली गई।

लगातार पूछताछ और तकनीकी निगरानी से पता चला कि यह एक बड़ा अंतरराज्यीय गिरोह है जो विभिन्न स्रोतों से शिशुओं को लेकर निसंतान दंपतियों को मोटी रकम पर बेचता था।
गिरफ्तार 10 आरोपियों में ज्योति (आशा वर्कर), गुरुग्राम से बच्चे की बिक्री में मध्यस्थ की भूमिका निभा रही थी।शंकर, साबरकांठा, गुजरात से है ।साहिबा उर्फ कालिया गामर का सहयोगी, ज्योति और प्रतिभा तक बच्चे पहुंचाता था सुगनाबेन और कांतिभाई गामर (जैविक माता-पिता), साबरकांठा, गुजरात से है । अपने बच्चे को साहिबा उर्फ कालिया और शंकर को बेचा। गरिमा जैन, रोहिणी, दिल्ली में 04 जून 26 से 05/ जून 26 तक हीरा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती रही और वहीं से बच्चा लिया। सतीश जैन (गरिमा के ससुर): हीरा हॉस्पिटल की डॉ. विवेकी कपूर को बच्चे के लिए 08 लाख रुपये दिए। केतकी गुप्ता, ऋषिकेश, उत्तराखंड से है 10 साल से निसंतान, डॉ. विवेकी और प्रतिभा से करीब 04 लाख में बच्चा खरीदा। राम प्रकाश निषाद (सेवानिवृत्त शिक्षक), मथुरा से है 2025 में विवेकी कपूर और हीरा लाल कपूर से एक बालक खरीदा। आभा सिंह और अमित प्रताप सिंह, हरिद्वार है।पहले से 09 साल की बेटी है, बेटे की चाह में प्रतिभा और विवेकी से करीब 05 लाख में बच्चा लिया।
9-10. अन्य में एक अस्पताल संचालक और ट्रैफिकर शामिल।

    पुलिस ने गुजरात और दिल्ली में लंबी पीछा और सर्विलांस के बाद जैविक माता-पिता को ट्रेस किया।
    4 और बच्चे बरामद, कुल 9 रेस्क्यू किए ।

    1.16 दिन का बालक – रोहिणी, दिल्ली से

    2. 01 माह का बालक – ऋषिकेश, उत्तराखंड से

    3. 01 साल 01 माह का बालक – मथुरा, उत्तर प्रदेश से

    4. 08 माह का बालक – हरिद्वार से
    इस तरह अब तक कुल 09 बच्चों को बचाया जा चुका है।

    जांच में सामने आया है कि यह गिरोह जरूरत और सप्लाई के सिद्धांत पर काम करता था। निसंतान दंपति गिरोह के संपर्क में आते थे और गिरोह ऐसे जरूरतमंद माता-पिता को ढूंढता था जो पैसों के लिए अपना बच्चा बेचने को तैयार हों। बैंक खातों में कई लाख के लेन-देन मिले हैं।

    एक मामले में आशिमा उर्फ आशी नाम की युवती से बच्ची ली गई, जिसने बिना पैसे लिए ही बच्ची दे दी थी। वहीं गुजराती दंपति से बच्चा लेकर पानीपत के दंपति सनी अरोड़ा और रितु अरोड़ा को ऊंचे दाम पर बेचा गया।

    पुलिस ने स्पष्ट किया कि जांच में अभी तक IVF या सरोगेसी का कोई एंगल नहीं मिला है।

    पुलिस ने अस्पताल और जन्म से जुड़े दस्तावेजी सबूतों को जांच के दायरे में लिया है। सभी 09 बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश कर उनके देखभाल और पुनर्वास के निर्देश प्राप्त किए गए हैं।

    इस संबंध में मध्य जिले के पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह, IPS ने बताया कि गिरोह के अन्य साथियों की भूमिका की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां व बरामदगी हो सकती हैं।

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