नई दिल्ली, 19 जून 2026: साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए राहत की खबर है। साइबर पुलिस ने मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) के जरिए 34 मामलों में पीड़ितों के ₹3,59,178 वापस कराए हैं।
क्या है मामला
- भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), गृह मंत्रालय द्वारा 70 एमआरएम रिक्वेस्ट पुलिस को भेजी गईं। • इनमें से 34 मामलों में दस्तावेज वेरिफिकेशन और इंडेम्निटी बॉन्ड की प्रक्रिया पूरी कर ₹3.59 लाख की राशि पीड़ितों के खातों में लौटाई गई। • 22 मामलों में शिकायतकर्ता बार-बार फोन करने के बावजूद थाने नहीं पहुंचे, जिससे प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। • बाकी मामले अभी प्रक्रिया में हैं।
कैसे मिलता है पैसा वापस
एमआरएम एक ऐसा सिस्टम है जिससे साइबर फ्रॉड में बैंक द्वारा होल्ड की गई ₹50,000 तक की राशि पीड़ित को लौटाई जा सकती है। I4C से गूगल शीट के जरिए रिक्वेस्ट मिलने पर पुलिस पीड़ित को फोन कर बुलाती है।
पीड़ित को थाने में व्यक्तिगत रूप से आकर ये दस्तावेज जमा करने होते हैं:
- ₹10 का स्टाम्प पेपर • पैन कार्ड की कॉपी
इसके बाद पहचान सत्यापन और इंडेम्निटी बॉन्ड भरवाकर दस्तावेज एमआरएम पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं। मंजूरी मिलने पर रकम वापस हो जाती है।
संयुक्त पुलिस आयुक्त (सेंट्रल रेंज) मधुर वर्मा, IPS ने बताया कि एमआरएम मामलों के लिए एक अधिकारी विशेष रूप से तैनात किया गया है। यह अधिकारी पीड़ितों से संपर्क, दस्तावेज तैयार करवाने, पोर्टल पर अपलोड और केस फॉलो-अप का काम देख रहा है। इससे प्रक्रिया तेज हुई है और ज्यादा पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद है।
संयुक्त आयुक्त मधुर वर्मा ने कहा, “मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल साइबर अपराध जांच में पीड़ित-केंद्रित पहल के रूप में सामने आया है। I4C के साथ समन्वय और लगातार फॉलो-अप से हम कोशिश कर रहे हैं कि योग्य पीड़ितों को जल्द से जल्द उनका ब्लॉक पैसा वापस मिले। यह पहल साइबर क्राइम निवारण और जन सेवा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”
नोट: साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। राशि होल्ड होने पर ही एमआरएम से रिकवरी संभव है।