नई दिल्ली: साइबर सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने ₹2 लाख की साइबर ठगी के मामले को सुलझाते हुए एक बड़े साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने राजस्थान से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
मधुर वर्मा, IPS, संयुक्त पुलिस आयुक्त, सेंट्रल रेंज ने बताया यह मामला 4 नवंबर 2025 को दर्ज FIR संख्या 90/2025 के तहत सामने आया। शिकायतकर्ता श्रीमती सुमन कुमार के बैंक खाते से ₹2,00,000 की अनधिकृत डेबिट ट्रांजेक्शन हुई थी। अमेरिका में रहने वाले उनके बेटे ने लेन-देन देखकर भारत आकर शिकायत दर्ज कराई थी।
जांच में पता चला कि ठगी की रकम पहले कर्नाटक बैंक के खाते में ट्रांसफर की गई और फिर मनी ट्रेल छुपाने के लिए कई बैंक खातों से घुमाई गई। बैंक लेन-देन, तकनीकी विश्लेषण और IP लॉग्स की गहन जांच से फर्जीवाड़े में इस्तेमाल मोबाइल नंबरों की पहचान हुई।
जांच में सामने आया कि यह संगठित साइबर फ्रॉड सिंडिकेट राजस्थान से ऑपरेट हो रहा था। पुलिस ने गांव केरपुरा, तहसील खंडेला, जिला सीकर, राजस्थान में छापेमारी कर आरोपियों को पकड़ा।
पुलिस के अनुसार, सिंडिकेट ऑनलाइन जुआ प्लेटफॉर्म के जरिए साइबर क्राइम की कमाई को सफेद कर रहा था। ठगी के पैसों को कई बैंक खातों में लेयर कर जुए के लेन-देन में इस्तेमाल किया गया। पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपी वर्चुअल/इंटरनेशनल मोबाइल नंबर, उनसे जुड़े व्हाट्सएप अकाउंट और एन्क्रिप्टेड चैनलों का इस्तेमाल करते थे।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी “वर्क फ्रॉम होम” का लालच देकर छात्रों और युवाओं को भर्ती करते थे। उनके बैंक खातों का इस्तेमाल अपराध की कमाई को रूट और लेयर करने के लिए किया जाता था।
व्हाट्सएप चैट, IP लॉग्स, बैंक रिकॉर्ड, जब्त इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और आरोपियों के बयानों के विश्लेषण से सिंडिकेट के काम करने का तरीका और आरोपियों की भूमिका साफ हो गई।
इस मामले में अभिषेक सिहाग ,. अंकित गढ़वाल , विकास बेनीवाल और.लोकेश कुमार,चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अन्य साथियों की पहचान और अपराध से जुड़ी अतिरिक्त रकम का पता लगाने के लिए जांच कर रही है।